स्टार न्यूज़ एजेंसी
पणजी (गोवा). मडगांव कस्बे में शुक्रवार रात हुए विस्फोट के सिलसिले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है. बताया जा रहा है कि विस्फोट में मारे गए दोनों लोग दक्षिणपंथी हिंदू संस्था के कार्यकर्ता हैं, जिसका मालेगांव विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा से संबंध रहा है.

पुलिस के मुताबिक़ योगेश नाइक और मालगोंदी पाटिल स्कूटर पर बम ले जा रहे थे, जो रास्ते में ही फट गए. विस्फोट के बाद मेलगुंड पाटिल की देर रात ही गोवा चिकित्सा कालेज अस्पताल में मौत हो गई थी, जबकि नाइक ने शनिवार सुबह क़रीब साढ़े नौ बजे दम तोड़ दिया. यह विस्फोट कस्बे के बीचों-बीच स्थित एक व्यस्त मार्ग पर गत शुक्रवार की रात करीब साढ़े नौ बजे एक स्कूटर में हुआ. पुलिस का कहना है कि सड़क पर जाम में फंस जाने के कारण देर हो गई और बम फट गया.

डीआईजी आर.एस.यादव ने बताया कि पुलिस ने आतंक फैलाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है. उन्होंने कहा कि चार बम रखे गए थे, जिनमें से एक फट गया और दो को मडगांव में निष्क्रिय कर दिया गया. एक बम मडगांव से 20 किलोमीटर दूर वास्को के सानकोले इलाके में एक मंदिर में रखा गया था. पुलिस ने यहां से भी विस्फोटकों से भरे बैग को बरामद कर विस्फोट की साजिश को नकाम कर दिया.

पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि दोनों हिन्दू संगठन 'सनातन संस्था' से संबंध रखते हैं. जिसका मालेगांव विस्फोट की आरोपी प्रज्ञा सिंह से कथित तौर पर जुड़ाव है। उन्होंने बताया कि मडगांव से क़रीब 20 किलोमीटर दूर पोंडा के रामनथी में इस संस्था का मुख्यालय है, जहां विस्फोट के बाद शुक्रवार रात छापा मारा गया.

राज्य के गृहमंत्री रवि नायक का कहना है कि विस्फोट के लिए हिन्दू संगठन 'सनातन संस्था' ज़िम्मेदार है. उन्होंने कहा है कि विस्फोटक को जिस स्कूटर से लाया गया था वह दक्षिणपंथी हिंदू संस्था के शिष्य निशाद बाकले का है.

धमाकों की जांच के लिए महाराष्ट्र से एटीएस की एक टीम भी यहां पहुंच चुकी है. सूत्रों के मुताबिक़ इस मामले में योगेश नाइक के भाई सुरेश और पुणे के संदीप शिंदे समेत 5 लोगों से पूछताछ जारी है.

उधर, सनातन संस्था ने इन आरोपों को गलत बताया है.

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है... - एक सवाल अकसर पूछा जाता है, दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है...? अमूमन लोग इसका जवाब भी जानते हैं... कई बार हम जानते हैं, और समझते भी हैं, ...
  • दस बीबियों की कहानी - *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* कहते हैं, ये एक मौजज़ा है कि कोई कैसी ही तकलीफ़ में हो, तो नीयत करे कि मेरी मुश्किल ख़त्म होने पर दस बीबियों की कहानी सुनूंगी, त...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं