स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में व्यापक परितर्वन के लिए आज यहां 'दहेज के खिलाफ बेटियां' अभियान का शुभारंभ किया।
दहेज के कारण महिलाओं के उत्पीड़न की बढती घटनाओं पर चिंता प्रकट करते हुए केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि केवल कानून से ही दहेज की इस कुप्रथा से मुक्ति नहीं मिल सकती, बल्कि इस कुरीति के खिलाफ लड़ाई के वास्ते नागरिक समाज को व्यापक जन अभियान के लिए भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत स्कूलों की लड़कियों में दहेज के खिलाफ संघर्ष की भावना पैदा की जाएगी जो न केवल हर तरह के दहेज के खिलाफ संकल्प लेंगी बल्कि अपने मात-पिता को इस मुद्दे पर जागरूक करेंगी।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के विरूध्द हिंसा बिल्कुल अनुचित और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि समाज के पढे लिखे और शिक्षित तबके को आगे आकर इसके खात्मे के लिए सक्रिय प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज दहेज प्रथा के अंत के लिए 'विवाह' के संबंध में नये विचार विकसित कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी ख़ासकर लड़कियां दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष छेड़ेंगी।
इस अवसर पर करीब 500 लड़कियों को उनके शिक्षकों के साथ इस कुरीति के खिलाफ जागरूक बनाया गया। उन्हें दहेज रोकथाम अधिनियम के क्रियान्वयन के तौर तरीके बताए गए। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। मंत्री बाल विवाह के रोकथाम पर एक पुस्तिका भी जारी की गई.
मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की
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*फ़िरदौस ख़ान*
भौतिकवादी संस्कृति ने जहां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है,
वहीं मनुष्य का स्वास्थ्य भी इससे न अछूता रहा हो तो इसमें हैरानी की को...

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