एक्टी काकतालियो गोलपो (एक आकस्मिक कहानी)

भारतीय पैनोरमा,
बंगाली 10 मिनट 35 मिमि रंगीन
यह कहानी 13 वर्षीय एक लड़के बबाई के चारों ओर घूमती है। एक बूढे व्यक्ति ने, जो उसके अपार्टमेंट के भूतल पर रहता था, बबाई को एक जादुई संगमरमर का टुकड़ा दिया। बूढे व्यक्ति ने उसे यह भी बताया था कि इस जादुई संगमरमर के टुकड़े में मछलियों के राजा को आमंत्रित करने की शक्ति है। बबाई का शिक्षक, जो इसी अपार्टमेंट में रहता था, ने उस संगमरमर के टुकड़े को यह कहते हुए ले लिया कि वह कल्पना की दुनिया में जीने से ज्यादा अपनी पढार्ऌ में मन लगाये। जब से संगमरमर के टुकड़े को उसके शिक्षक ने उससे ले लिया था, उसे अपने सारे सपने बिखरते नजर आने लगे। लेकिन इन सभी संयोगों ने घटनाचक्र को एक नया मोड़ दे दिया।

निर्माता फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया
निर्देशन तथागत सिंघा
छायांकन सौमिक मुखर्जी
सम्पादन श्रेया चटर्जी

भारतीय पैनोरमा
कन्नड़ 90 मिनट 35 मि.मी. रंगीन
कर्नाटक में, दूर-दराज के क्षेत्र में छाया पत्रकार आनन्दा चेन्नी नामक एक महिला से मिलता है, जो दैवीय आपदाओं से स्थानीय लोगों की रक्षा के लिए ग्राम देवता की वेदी पर बसावी बना दी गयी है । बसावी की परिणति देवदासियों की तरह वेश्या जैसी हो जाती है और वह इस सामाजिक कलंक को जिन्दगी भर ढोती रहती है। आनन्दा को यह जानकर आघात लगता है कि चेन्नी एक बसावी है और वह उसे अन्धविश्वासों की वेदी पर स्वयं को न झोंकने के लिए प्रेरित करता है । वह उस पर जोर डालता है कि वह विवाह के बंधन में बंध जाए । चेन्नी उस फोटो पत्रकार से पूछती है कि क्या वह उससे शादी करेगा किन्तु पत्रकार में इतना साहस नहीं है । अगले दिन मंदिर के तालाब की सीढ़ियों पर चेन्नी मृत पायी जाती है। वह पत्रकार चेन्नी द्वारा की गई आत्महत्या के लिए स्वयं को दोषी मानता है क्योंकि उसमें चेन्नी को नया जीवन देने का साहस नहीं था ।

आंगशुमानेर छोबी (आंगशुमान की फिल्म)
भारतीय पैनोरमा
बंगला 125 मिनट 35 मिमि रंगीन
आंगशुमान ने इटली में फिल्म निर्माण में पाठयक्रम को पूरा करने के लिए आठ साल पहले कोलकाता छोड़ दिया था । वह वृत्त-चित्र और विज्ञापन कार्य में भविष्य निर्माण के लिए वहीं ठहर गया । लेकिन उसे अपने कॉलेज के प्रोफेसर से बंगाली में फिल्म बनाने का वादा पूरा करना है । एक प्रसिध्द पेंटर और एक युवा नर्स के बीच असाधारण सम्बंध वाली मनोरंजक पाण्डुलिपि (स्क्रिप्ट) से लैस आंगशुमान कोलकाता पहुंचता है । लेकिन फिल्म प्रद्युत निर्माण की यह योजना तीन लोगों सहित अनेक बाधाओं के कारण शुरू नहीं हो पाती । बंगाली सिनेमा की प्रसिध्द हस्ती मधुरा, जो अपनी पहली फिल्म के लिए जीते गये राष्ट्रीय पुरस्कार द्वारा सृजित अपेक्षाओं के बिना नहीं रह सकती, अब स्वयं द्वारा अपनायी गयी गुमनामी में जी रही है और नृत्य तथा ज्योतिष से गहन लगाव रखने वाला एक युवा नील, सौभाग्य से अपने जीवन को ओजपूर्ण पा रहा है ।

निर्माता टी सरकार प्रोडक्शंस
निर्देशन/पटकथा अतनु घोष
सम्पादन सुजॉय दत्ता रे
छायांकन संजीव सेन
संगीत राकेट मंडल
पात्र मम्मोट्टी पद्मा, प्रिया, मीना कुमारी

कुट्टी स्रैंक
भारतीय पैनोरमा
मलयालम 127 मिनट35 मिमि रंगीन
पुलिस को समुद्र तट पर अज्ञात लाश मिली और तभी तीन महिलाएं आती हैं। तीनों महिलाएं कुट्टी स्रैंक को अपना बताती हैं। उनमें से एक धनवान महिला है जो बुध्दिस्ट नन बनना चाहती हैं। दूसरी महिला एक अभिनेत्री है जो एक हत्या के आरोप में फंसी हुई है। उसने कुट्टी स्रैंक के साथ पारम्परिक ईसाई नाटक में अभिनय किया था। तीसरी भद्र महिला है जो कुट्टी स्रैंक से गर्भवती है। क्या इस फिल्म से कुट्टी स्रैंक के वास्तविक व्यक्तित्व का पता चल पायेगा ?

निर्माता रिलायंस बिग पिक्चर्स
निर्देशनपटकथा साजू एन. करण
सम्पादन श्रीकर प्रसाद
छायांकन अंजली शुक्ला
संगीत इशाक कोटकपल्ली
पात्र मम्मोट्टी पद्मा, प्रिया, मीना कुमारी

स्वयंभू सेन को अपनी मृत्यु का पूर्वानुमान है
भारतीय पैनोरमा
हिन्दी/मलयालम/अंग्रेजी 9 मिनट 35 मिमि रंगीन
यह 26 जुलाई, 2005 है। तीन कथावाचक एक बस के ऊपर एक विशिष्ट फिल्म निर्माता, जो अपनी फिल्म बनाने के लिए हर आवश्यक चीज की चोरी करता है और यहां तक कि वह फिल्म स्टॉक से कैमरा तक चुरा लेता है, की शहरी दंतकथा से असहाय लोगों का मनोरंजन करते हैं। इसके अलावा तीनों कथावाचक कहानियों को अलग-अलग ढंग से पेश करते हैं। फिल्म भाग्य की संभावनाओं और व्यवसाय में सच्ची प्रतिभा की जादुई और अंधकार युक्त यात्रा है जिससे भारतीय सिनेमा भी वंचित है।

निर्माता भारतीय फिल्म और दूरदर्शन संस्थान, पुणे
निर्देशनपटकथा देवाशीश मेधेकर
सम्पादन मोनिशा आर. बाल्दावा
छायांकन सुबैय्या कुटप्पा

फॉर रियल
भारतीय पैनोरमा
अंग्रेजी 86 मिनट 35 मिमि रंगीन
फॉर रियल एक ऐसे परिवार की कहानी है, जहां एक बच्चा परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने के प्रति संकल्पबध्द है, जबकि परिवार के बड़े सदस्य परिवार को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। छह वर्षीय श्रुति कुछ ऐसा जानती है जिसे कोई दूसरा नहीं जानता। उसकी मां को एलियनों द्वारा (दूसरे ग्रह के प्राणी) ओरियन ग्लेक्सी में भेज दिया जाता है और एक एलियन स्त्री उसकी मां का स्थान ले लेती है। यह एलियन रूपरंग में बिल्कुल श्रुति की मां के समान है, लेकिन श्रुति जानती है कि वह आन्तरिक तौर पर उसकी प्यारी मां से बिल्कुल अलग है। यह बात वह अपने भाई को बताती है और उससे सहायता मांगती है, लेकिन उसका भाई इस बात पर विश्वास नहीं करता। उसके पिता सदा की तरह अपने कामों में खोए रहते हैं और बेटी के लिए उनके पास कभी समय नहीं होता। वह एलियन को अपनी मां के रूप में स्वीकार नहीं कर पाती और ऐसी तनावग्रस्त स्थिति में वह घर से भाग जाती है। फिल्म में यह दर्शाया गया है कि अपनी असली मां को ढूंढने के लिए श्रुति को किन-किन राहों से गुजरना पड़ा, और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए एक आदमी को क्या-क्या संघर्ष करने पड़े।


इलिसा अमागी महाओ(हिल्सा का स्वाद)
भारतीय पैनोरमा
मणिपुरी 35 मिनट 44 मिमि वीडियो
अभी भोर का उजाला नहीं हुआ था। पिता और पुत्र अपनी नाव पर सवार हो नदी में आ पहुंचे थे। एक या दो बार नदी में अपना जाल फेंकने के बाद वे दक्षिण की ओर चल दिए। थोड़ा सा आगे की ओर जाने के बाद भाग्य उनका साथ देने लगा। एक बड़ी चांदी-सी सफेद हिलसा मछली उनके जाल में फंस चुकी थी। पिता ने फैसला किया कि वह उसे बेचेगा नहीं। वह सोचने लगा कि वह अपनी गर्भवती बेटी को भोजन करने के लिए घर बुलाएगा। वह हिलसा मछली के स्वाद को अपने परिवार के साथ मिल-बांट कर चखना चाहता था। लेकिन उसे पता चला कि उसके घर पर चावल कब का समाप्त हो चुका था।

निर्माता निर्देशक छायांकन निंगथौजा लांचा
पटकथा नाँगथौंमबम कुंजमोहन और निंगथौजा लांचा
सम्पादन रोमी लामबम
संगीत आर.के. बीरेन्द्रजीत
डॉट. इन फॉर मोशन

भारतीय पैनोरमा
अंग्रेजी 59 मिनट 20 मिमि वीडियो रंगीन
डॉट. इन फॉर मोशन आर्थिक उदारीकरण और सूचना क्रांति के पश्चात भारत के हालिया विकास और अपार भारतीय जनसाधारण के जीवन पर उसके प्रभाव का पता लगाती है । क्या वैश्वीकरण से ही स्वतंत्रता की प्राप्ति हो सकती है ? क्या खुले बाजार का तात्पर्य है - और अधिक खुला समाज ? क्या यह प्रजातंत्र का वास्तविक पोषक है ? अथवा यह विशाल विभिन्नता वाले इस राष्ट्र को धीरे-धीरे एकरूपता की ओर ले जाने वाली प्रक्रिया है । फिल्म में सिलिकॉन शहर से लेकर दूरस्थ जनजातीय गांव तक के ऐसे लोगों की आवाजों को तटस्थता से रिकार्ड किया गया है, जिन्होंने बिजली के बारे में कभी सुना ही नहीं।

निर्माता अमलेन दत्ता
निर्देशनपटकथा अनिर्बन दत्ता
छायांकन अमलेन दत्ता
संगीत प्रदीप चटर्जी

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1 अगस्त 2010, रविवार, 10 श्रावण (सौर) शक 1932, श्रावण मास 17 प्रविष्टे 2067, 19 शाबान सन हिजरी 1431, श्रावण कृष्ण षष्ठी रात्रि 8 बजकर 37 मिनट तक उपरान्त सप्तमी, रेवती नक्षत्र रात्रि 2 बजकर 1 मिनट तक तदनन्तर अश्विनी नक्षत्र, धृति योग रात्रि 4 बजकर 11 मिनट तक पश्चात शूल योग, गर करण, चन्द्रमा रात्रि 2 बजकर 1 मिनट तक मीन राशि में उपरान्त मेष राशि में. पंचक समाप्त रात्रि 2 बजकर 2 मिनट पर. तिलक स्मरणोत्सव दिवस. रवि षष्ठी. सूर्य दक्षिणायन. सूर्य उत्तर गोल. वर्षा ऋतू . सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक राहु काल. सूर्य : कर्क राशि में, चंद्रमा : मीन राशि में, बुध : सिंह राशि में, शुक्र : सिंह राशि में, मंगल : कन्या राशि में, वृहस्पति : मीन (वक्री) राशि में, शनि : कन्या राशि में, राहु : धनु राशि में, केतु : मिथुन राशि में. (ज्योतिषाचार्य वेदप्रकाश जाबाली)

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