स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कापीराइट कानून, 1957 में संशोधन के लिए विधेयक लाने की मंजूरी दे दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कुछ बातों को स्पष्ट करने, प्रचालनगत त्रुटियों को दूर करने तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं इंटरनेट के संदर्भ में उभरे नए मसलों से निपटने के लिए इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया है।

कापीराइट कानून को विश्व बौध्दिक संपदा संगठन कापीराइट संधि और विश्व बौध्दिक संपदा संगठन कार्यनिष्पादन एवं फोनोग्राम्स संधि जैसी विश्व बौध्दिक संपदा संगठन इंटरनेट संधियों के अनुरूप बनाने के लिए संशोधित करने का प्रस्ताव है। ये संधियां इन क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों का निर्धारण करती हैं। हालांकि भारत ने अभी तक उक्त संधियों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन डिजिटल माहौल में कापीराइट संरक्षण के विस्तार के लिए घरेलू कानून में संशोधन करना आवश्यक है।

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को ब्रेल लिपि, बात करने वाले पाठ, इलैक्ट्रानिक पाठ, बड़े प्रिंट इत्यादि के प्रारूप में कापीराइट सामग्री तक पहुंच की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए रायल्टी भुगतान संबंधी अतिरिक्त ज़रूरतों के लिए भी कानून में संशोधन का प्रस्ताव है।

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