"यूपी का भी करें विभाजन !"
लोकतंत्र में ऐसे मुद्दे, अधिक लाभदायक हैं, राजन ??


केंद्र और तेलंगाना !
तब तक इन्हें टाल दें, जब तक, बेहतर ना मिल जाए बहाना !!


छोटे सूबे !
जैसे कोई डाइटिंगकर्ता, अपने मोटापे से ऊबे !!


सूबों की राजनीति !
खेल रहे हैं वही, जिन्हें है, सत्ता से, कुर्सी से प्रीति !!


निरक्षरता !
अक्षर चार चबा लेने से, भूखा पेट कभी नहीं भरता !!


अभिशाप !
सरकारी दारू पिलवाकर, उसको यूं ना बोलें आप !!


पलटे बयान से !
अटकी थी तलवार हमारी, निकली नहीं मयान से !!


हड़ताल !
वक़्त काम करने को ना हो, लेकिन इसको वक़्त निकाल !!


विकास !
रिश्वतखोरों के हाथों में, आकर काफी रहे उदास !!


भाव !
ऐसे बढ़ते हैं, सत्ता में, आने पर ज्यों बढ़े शबाब !!


सेवाएं !
नहीं करें, पर पूछें अक्सर, " अन्य कोई सेवा बतलाएं ?? "
-अतुल मिश्र

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