स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. ब्रिटेन के एक अध्ययन के मुताबिक जब व्यक्ति गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर बात करता है तो वह शराब के नशे में गाड़ी चलाने से कहीं ज्यादा जोखिमभरा होता है। यूके के वैज्ञानिकों इस अध्ययन में 20 विषयों को शामिल किया जिनको गाड़ी चलाने के दौरान समय और गाड़ी चलाने के विभिन्न पहलुओं पर टेस्ट किए. शोधकर्ताओं ने गाड़ी चलाने के दौरान गड़बड़ाने वाले असंतुलन के तब असर को भी देखा जब व्यक्ति हैंड्स फ्री फोन का इस्तेमाल करता है और वह काफी शराब भी पी चुका हो यानी जितनी कानूनी सीमा है उससे अधिक ली हो।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने ब्रिटेन के इस अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि ड्राइवरों में प्रतिक्रिया का समय औसतन 30 फीसदी कम रहा जब उन्होंने कानूनी तौर पर दी गई मात्रा में शराब लेकर मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए गाड़ी चलाई। और यह सामान्य परिस्थितियों में यानी बिना शराब लेने वालों में यह प्रतिक्रिया गाड़ी चलाते समय 50 फीसदी धीमी रही। जो ड्राइवर गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करते हैं वे गाड़ी की स्पीड पर काबू पाने में कम सक्षम होते हैं बनिस्बत जो शराब पीकर भी अपने आप पर काबू रखते हैं और वे ऐसे में उनको अपने सामने वाली गाड़ी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में दिक्कत होती है।

हाथ से पकड़कर मोबाइल फोन पर बात करने पर गाड़ी चलाने के दौरान सबसे ज्यादा जोखिमभरा होता है। औसतन सामान्य लोगों की तुलना में हाथ से पकड़कर मोबाइल फोन पर बात करने वाले रिएक्ट करने में आधा सेकंड अधिक समय लेते हैं और जब शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं तो यह रिएक्शन एक तिहाई सेकंड अधिक समय के बाद होता है। का होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 70 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आधा सेकंड का मतलब अतिरिक्त 46 फुट की दूरी से है जिससे कि सड़क हादसा हो सकता है। हैंड्स फ्री मोबाइल भी सुरक्षित नहीं होता। याद रखें फोन पर बात और शराब दोनों एक साथ अपनाने से स्थिति कहीं ज्यादा जोखिमभरी होती है।

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