आस
नेताजी ने दिया बयान।
हुआ शहीदों का अपमान।।
शांति-ज्योति से ध्यान हँटाकर।
किया लिपिस्टिक का वह ध्यान।।
संसद पर जब हुआ था हमला।
भाग गए ले कर जी जान।।
खुद को चतुर सियार मानते।
जनता को बिल्कुल नादान।।
आतुर हैं कुर्सी की खातिर।
छीनी है सबकी मुस्कान।।
भाषण से रोटी न मिलती।
मरते हैं क्यों रोज किसान।।
चप्पा चप्पा लूट लिया जो।
बेच न दे वो हिन्दुस्तान।।
जन जन में अब जगी चेतना।
लौटेगी अपनी पहचान।।
जगत गुरू भारत हो फिर से।
यही सुमन का है अरमान।।
-श्यामल सुमन
अपने देश में बेगानी हिन्दी...
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हर भाषा की अपनी अहमियत होती है...फिर भी मातृ भाषा हमें सबसे प्यारी होती
है...क्योंकि उसी ज़बान में हम बोलना सीखते हैं...बच्चा सबसे पहले मां ही
बोलता ...
