स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. दूसरा भारत-अफ्रीका हाईड्रोकार्बन सम्मेलन आज यहां शुरू हुआ. इस अवसर पर पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवरा ने अफ्रीका में वर्तमान और आगामी एलएनजी टर्मिनलों में इक्विटि भागीदारी के साथ-साथ एलएनजी स्रोत में भारतीय कंपनियों की भागीदारी की घोषणा की। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्ण उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के लिए दीर्घकालीन लाभ हेतु उचित वैश्विक एवं प्रतिस्पर्धी ऊर्जा बाजार की स्थापना का आह्वान किया.

देवरा ने कहा कि अफ्रीका की प्राकृतिक गैस के लिए भारत एक स्थिर, दीर्घकालीन और उभरता हुआ बाजार हैं. उन्होंने अंगोला, घाना, सूडान, नाईजीरिया, युगांडा और कोट डी आईवौरी में खोज और उत्पादन सुविधाओं में भागीदारी की इच्छा जताई. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में भारत ने सूडान, नाईजीरिया, लीबिया, मिस्र, गेबन, कॉगो ब्राज्जाविले, नाईजीरिया-साओ टोम संयुक्त विकास क्षेत्र और गुयाना में तेल और गैस की खोज और उत्पादन में निवेश किया है.

विदेश मंत्री एस.एम. कृष्ण ने भारत की ओर से अफ्रीका के हाईड्रोकार्बन क्षेत्र में आपसी लाभकारी साझेदारी का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा के रूझान बताते हैं कि विकसित दुनिया में तेल की मांग अपने चरम पर पहुंच चुकी है. उन्होंने बताया कि 2030-31 तक भारत को 90 प्रतिशत तेल और 60 प्रतिशत गैस का आयात करना होगा.

उन्होंने सुझाव दिया कि सम्मेलन के दौरान, तेल और गैस बाजारों के उतार-चढ़ाव, ऊर्जा व्यापार और निवेश संवर्द्वन, ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं के बीच सूचना की कमी और तेल और गैस के आवागमन और परिवहन की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा.

सम्मेलन के उदघाटन सत्र को पैट्रोलियम और गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एस. सुदर्शन, संयुक्त सचिव सुनील जैन, ऊर्जा और संसाधन के सलाहकार संजय कौल द्वारा भी संबोधित किया गया.

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