सरफ़राज़ ख़ान
नई दिल्ली. दस फीसदी हृदयाघात के मामले इमरजेंसी में डायग्नाज ही नहीं हो पाते. ऐसे मरीज़ों और डॉक्टरों के लिए मिनटों की बहुत अहमियत होती है. इसमें 10 प्रतिशत पॉजिटिव रेट की गिरावट स्वीकार्य है.
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने बताया कि क्रिसमस त्योहार के आसपास हृदयाघात अधिक होते हैं और इस दौरान ईसीजी में चूक हो सकती है, क्योंकि हृदयाघात के बाद के पहले छह घंटे में यह सामान्य हो सकती है.

डॉ. अग्रवाल ने जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए हृदयाघात के फाल्स पॉजिटिव या फाल्स निगेटिव डायग्नासिस में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने पर ज़ोर दिया. अध्ययन में हेनरी एंड ग्रुप ने 1,345 लोगों में इमरजेंसी पर लिये गये फैसलों को देखते हुए 2003 से लेकर 2006 तक हृदयाघात के आशंकित चिकित्सीय उपचार के रिकॉर्डों को आधार बनाकर अध्ययन किया.

सभी आशंकित मरीजों में स्टेमी हार्ट अटैक हुआ, जिसे विशिष्ट इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के ज़रिये चिन्हित किया. उनमें से 187 लोगों (14 फीसद) में कोरोनरी आर्टरी का ब्लॉकेज वास्तव में नहीं हुई साथ ही 127 (9.5 फीसद) में कोरोनरी आर्टरी डिसीज नहीं पायी गई और 149 लोगों में (11.2 फीसद) कार्डिएक बायोमार्कर टेस्ट के निगेटिव परिणाम सामने आए.

बचने वाले लोगों में महत्वपूर्ण अंतर यह देखा गया कि जिनकी आर्टरी (धमनी) ब्लॉक हुई, उनमें 30 दिवसीय मौत की दर 4.6 फीसदी थी, जबकि बिना ब्लॉकेज वालों में यह दर 2.7 फीसद रही.

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