ग़ज़ल
हम इधर देखें कि उधर देखें,
लोग देखें कि हम जिधर देखें,

तुझको बस,देख के,ऐ पर्दानशीं
सोचते हैं कि अब किधर देखें ?

तेरी नज़रों की शोख़ियों के लिए
दिल यह करता है,ता उमर देखें !

नज़रे-मय उसकी आज पीकर हम
कैसे होता है, क्या असर देखें !

रात भर तेरी याद में जगकर
कैसी होती है फिर सहर देखें !

ये ज़रूरी है मौत से पहले
ज़िन्दगी का सही, सफ़र देखें !

कल तलक तो मरा नहीं था 'अतुल'
आज अखब़ार की ख़बर देखें !
-अतुल मिश्र

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • राहुल गांधी को समर्पित एक ग़ज़ल - भारत की मुहब्बत ही इस दिल का उजाला है आंखों में मेरी बसता एक ख़्वाब निराला है बेटा हूं मैं भारत का, इटली का नवासा हूं रिश्तों को वफ़ाओं ने हर रूप में पाला है...
  • क्या आप जानते हैं - सवाल : पहले जुम्मा किसने क़ायम किया ? जवाब : हज़रत असद बिन जुरारह ने सवाल : क़यामत के दिन सबसे पहले लोगों के दरमियान किस चीज़ का फ़ैसला होगा ? जवाब : ख़ून का सवाल...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं