कुछ सीढ़ियों का है फ़ासला
वो मिल जाएगा
अपनी शुरुआत का एक सिरा
हाथों में थमा जायेगा
होंगी कुछ बातें हमारे बीच
हमारे आस-पास........
देखते-देखते
फिर होगा कुछ सीढ़ियों का फ़ासला
और वो मिल जाएगा
सिलसिला रुकेगा नहीं
बस हमें थोड़ा रुकना है
आंखों में विश्वास भरकर कहना है
'यह साल तुम्हें ढेरों खुशियां दे जाए'
-रश्मि प्रभा
मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की
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*फ़िरदौस ख़ान*
भौतिकवादी संस्कृति ने जहां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है,
वहीं मनुष्य का स्वास्थ्य भी इससे न अछूता रहा हो तो इसमें हैरानी की को...

बहुत सुन्दर संदेश.