स्टार न्यूज़ एजेंसी
40 साल की उम्र के बाद सांस की किसी भी तरह की समस्या अगर सर्दी के दिनों में पहली बार होती है तो यह जब तक कुछ और साबित न हो जाए कार्डिएक अस्थमा होता है. ऐसे मरीजों को चाहिए कि वे तुरंत अपना रक्तचाप चेक करवाएं और अगर यह उच्च हो तो जल्द चिकित्सीय उपचार करवाएं. पहली बार सांस की समस्या एन्जाइना या दिल के दौरा का सूचक भी हो सकती है.

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने बताया कि सर्दी का अस्थमा या एक्यूट एक्जासरबेशन ऑफ विंटर सीओपीडी (क्रोनिक ब्रांकाइटिस) की अधिक संभावना होती है. अस्थमा रिवरसेवल एयरवे ऑब्स्ट्रक्शन होता है और सीओपीडी इररिवरसेवल एयरवे ऑब्स्ट्रक्शन होता है. अचानक से सर्दी का सामना करने पर, आद्रता से, वातावरण में प्रदूषण का स्तर गिरने से अस्थमा की आशंका बढ़ जाती है. सर्दी के मौसम में अस्थमा की दवाओं की डोज़ बढ़ाने की जरूरत होती है.

अगर एक व्यक्ति पूरा वाक्य बोल लेता है तो उसमें अस्थमा का अटैक हल्का होता है और अगर बोलने में हकलाता है तो वह मध्यम होता है और अगर अस्थमा के दौरान व्यक्ति सिर्फ शब्द बोल पाता है तो स्थिति गंभीर होती है. गंभीर आघात की स्थिति में व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में दाखिल कराए जाने की जरूरत होती है. अस्थमा का आघात इन्फ्लैमेशन, पाइप के जरिए तरल पदार्थ का सिकुड़ना और एकत्रित होना होता है और विंड पाइप को चौड़ा करने के लिए दवाओं की जरूरत व इन्फ्लेमेशन में कमी करने की ज़रूरत पड़ती है.

अस्थमा के लिए स्थायी तौर पर दवा लेने की जरूरत होती है. ऐसी स्थितियों में दो का फार्मूला अपनाना चाहिए. पहला जो व्यक्ति एक साल में दो कनिस्टर इनहेलर का इस्तेमाल करता है या एक महीने में रात में दो या इससे अधिक बार दवाएं लेता है या हफ्ते में रोजाना दो से अधिक बार दवाएं लेता है तो उसे लगातार अस्थमा और एंटी इन्फ्लेमेट्री दवाएं लेने की जरूरत होती है. इनहेलर सबसे बढ़िया विकल्प हैं.

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है... - एक सवाल अकसर पूछा जाता है, दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है...? अमूमन लोग इसका जवाब भी जानते हैं... कई बार हम जानते हैं, और समझते भी हैं, ...
  • दस बीबियों की कहानी - *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* कहते हैं, ये एक मौजज़ा है कि कोई कैसी ही तकलीफ़ में हो, तो नीयत करे कि मेरी मुश्किल ख़त्म होने पर दस बीबियों की कहानी सुनूंगी, त...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं