ज़्यादा खाना, एक नई समस्या

Posted Star News Agency Saturday, January 23, 2010



स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. बहुत ज्यादा खाने की समस्या समाज के लिए एक नई समस्या है। इस समस्या के शिकार कार लोग जब कम खाना चाह रहे होते हैं तब भी वे काफी खाते हैं।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया और ई मेडिन्यूज के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक ह समस्या बिंगे पर्ज सिंड्रोम (ब्यूलीमिया नर्वोसा) से अलग होती है क्योंकि ज्यादा खाने वाले लोगों में आमतौर पर उल्टी या लैक्सैटिव के इस्तेमाल की वजह से मल त्याग नहीं कर पाते हैं। लेकिन अधिकतर और गंभीर ज्यादा खाने की समस्याएं तब होती हैं जब :

कई बार खाना भले ही वह असमान्य तरीके से भी भोजन की मात्रा काफी अधिक हो।
बार-बार खाने से अपने आपको न रोक पाना या फिर कि आपने कितना खा लिया इसका हिसाब न होना।
इनमें से कई व्यवहार या अहसास होना
सामान्य तरीके से कहीं ज्यादा तेजी से खाना।
इतना खा लेना कि अपने आपको असहज महसूस करना।
भोजन ज्यादा लेना, भले ही भूख क्यों न लगी हो।
शर्मिंदगी के चलते अकेले खाना कि आप बहुत ज्यादा खाते हैं।
ज्यादा खाने के बाद के उकताना, अवसाद या खुद को दोशी महसूस करना।
ज्यादा खाने की समस्या हफ्ते में कम से कम दो बार 6 महीनों के लिए होना।

ज्यादा खाने की मुख्य जटिलता से मोटापे से सम्बंधित बीमारियां होती हैं। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर, गॉल ब्लैडर डिसीज़, हार्ट डिसीइज और कुछ तरह के कैंसर शामिल हैं।

ज्यादा खाने से खुद को रोक न पाना अधिक खाने की आज की सबसे बड़ी समस्या है जो एनोरैसिया और ब्यूलीमिया से कहीं ज्यादा आम है. और इससे मोटापे के मामले बढ़ते हैं। ज्यादा खाने से 3.5 फीसदी महिलाएं और 2 फीसदी पुरुश अपनी जिंदगी में कुछ बिंदुओं के हिसाब से ग्रसित हैं। ज्यादा खाने की समस्या महिलाओं में पुरुषों से थोड़ी सी ज्यादा है. हर तीन महिलाओं की तुलना में दो पुरुषों में यह समस्या है।

कॉग्नेटिव बीहैविरल थेरेपी में लोगों को बताया जाता है कि किस तरह से खाने पर काबू रखें और अपनी अस्वस्थ आदतों में सुधार लाएं। इसमें यह भी बताया जाता है कि किस तरह से कठिन परिस्थितियों से निपटा जाए। इंटरपर्सनल साइकोथेरेपी से लोगों को उनके दोस्तों और परिजनों के रिश्तों में होने वाले बदलाव और क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। ड्रग थेरेपी जैसे कि एंटीडिप्रेसैंट्स से भी कुछ लोगों में मददगार हो सकती है।

ज्यादा खाना जिसमें कॉर्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा अधिक हो को तेजी से कम समय में खा लिया जाता है। इसकी अधिक मात्रा कलिए महज 15 से 20 मिनट ही काफी होते हैं। सीरोटोनिन और डोपामाइन का पर्याप्त स्तर भी इसमें जुड़ जाता है। प्रोटीन सप्लीमेंट आपकी लालसा में कमी ला सकता है।

ज्यादा खाना कंपल्सिव ओवरईटिंग से अलग होता है, क्योंकि ज्यादा खाने वाला इसकी योजना नहीं बनाता है और पूरा आनंद लेता है। कंपल्सिव ओवरईटिंग वाले ऐसे भोजन के लिए लालायित होते हैं जो कार्बोहाइड्रेट, शुगर और नमक से भरपूर होते हैं।

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Blog

  • अल्लाह की रहमत से ना उम्मीद मत होना - ऐसा नहीं है कि ज़िन्दगी के आंगन में सिर्फ़ ख़ुशियों के ही फूल खिलते हैं, दुख-दर्द के कांटे भी चुभते हैं... कई बार उदासियों का अंधेरा घेर लेता है... ऐसे में क...
  • एक दुआ, उनके लिए... - मेरे मौला ! अपने महबूब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सदक़े में मेरे महबूब को सलामत रखना... *-फ़िरदौस ख़ान*
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

Like On Facebook

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं