नया वर्ष शुभ मंगलमय हो !!
सब्जी महंगी, आटा गीला,
पर्स वृद्ध नेता सा ढीला,
बिना दाल-चावल के, ऊपर-
ताक रहा मुंह खोल पतीला !
महंगाई फिर कमर ना तोड़े,
कमर-कमर की इतनी वय हो !
नया वर्ष शुभ, मंगलमय हो !!

बूढ़े सारे सांड हो गए,
फिर भी कैसे कांड हो गये,
जो पहले रसगुल्ला-रस थे-
चावल-निकले मांड हो गए !
इन लोगों की करतूतों से,
महिलाओं को भी ना भय हो !
नया वर्ष शुभ, मंगलमय हो !!

नया वर्ष शुभ, मंगलमय हो !
भाई-भाई खुद में टकराकर,
जन्म-भूमियों से घबराकर,
नेताओं के कर्म देखकर-
राम मिले मस्जिद में आकर !
सभी अजानों में मस्जिद की,
मंदिर के घंटों की लय हो !
नया वर्ष शुभ, मंगलमय हो !!
-अतुल मिश्र.

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है... - एक सवाल अकसर पूछा जाता है, दोस्तों और जान-पहचान वालों में क्या फ़र्क़ होता है...? अमूमन लोग इसका जवाब भी जानते हैं... कई बार हम जानते हैं, और समझते भी हैं, ...
  • दस बीबियों की कहानी - *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* कहते हैं, ये एक मौजज़ा है कि कोई कैसी ही तकलीफ़ में हो, तो नीयत करे कि मेरी मुश्किल ख़त्म होने पर दस बीबियों की कहानी सुनूंगी, त...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं