स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय देश में क्षरित वन्य क्षेत्रों एवं उनके आस-पास के इलाकों के पुनरूद्भवन के लिए राष्ट्रीय वनारोपण कार्यक्रम (एनएपी) चला रहा है । इसमें वन संभाग स्तर पर वन विकास एजेंसी की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था तथा ग्रामस्तर पर संयुक्त वन प्रबंधन समितियां शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत पिछले तीन वर्षों के लिए 666 496 हेक्टेयर तथा मौजूदा वर्ष के लिए 26,634 हेक्टेयर भूमि परियोजना चलाई गई ।

वनारोपण एवं वनों के संरक्षण के लिए असम में मौजूदा चार इको टास्क फोर्स (इटीएफ) में दो और ईटीएफ जोड़े गए। पंजायती राज संस्थानों ग्रामपंचायतों आदि को शामिल कर पंचायती वन योजना पर विचार चल रहा है। ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्रालय समेत कई मंत्रालयों की योजनाओं में पौधरोपण को भी मंजूरी दे दी गई है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ मिलकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना और एनएपी के बीच समन्वय कायम कर चल रहा है। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के आठ मिशनों में एक मिशन हरित भारत भी है जिसके तहत वनारोपण कार्यक्रम के जरिए जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम किया जा रहा है।

2009-10 के केन्द्रीय बजट में 500 करोड़ रूपये के आवंटन से वन क्षेत्र पुनर्स्थापन पुनरूद्भवन वर्ध्दित कार्यक्रम शामिल किया गया है। वन्य क्षेत्रों की सुरक्षा एवं प्रबंधन राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। केन्द्र की समेकित वन सुरक्षा योजना के तहत वनों की आग पर नियंत्रण, प्रबंधन, अवसंरचना विकास आदि के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

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