कैवल्य मिश्र
हमारे देश में बहुत से ऐसे कलाकार हैं, जो गुमनामी का जीवन जी रहे हैं. सरकारी महकमे में रहते हुए वे अपनी इस कला को आज भी जीवित किये हुए हैं. ऐसे ही एक चित्रकार हैं संजीव सूद, जो मुंबई में रहते हैं. प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश--
कैवल्य : आपको यह शौक कैसे लगा ?
संजीव : बचपन से ही रंगों से प्यार था. जो भी खूबसूरत देखता था, तो मन करता था कि उसे रंगों से भर दूं. स्कूल के दिनों में मेरे चित्रों को क्लास में दिखाया जाता था कि ऐसे चित्र होने चाहिए.
कैवल्य : प्रेरणा कहां से मिली ?
संजीव : भगवान् की बनाई हुई इस दुनिया से. जब वक़्त मिलता है, कुछ ना कुछ बनाने लग जाता हूं.
कैवल्य : आपका जन्म कहां और कब हुआ ?
संजीव : हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी शहर से हमारा परिवार मुंबई आ गया. 1969 में यहीं मेरा जन्म हुआ, मगर हिमाचल जब भी जाता हूं तो अपनी भूमि का सौंदर्य कभी नहीं भूल पाता हूं. पूरा हिमाचल ही एक सुन्दर कैनवास है.
कैवल्य : किस तरह के विषयों को आप ज़्यादा पसंद करते हैं, अपनी चित्रकला में ?
संजीव : यूं तो भगवान् की बनाई हुई इस दुनिया में सब कुछ खूबसूरत है, मगर प्राकृतिक दृश्य ज़्यादा पसंद हैं. मेरा मानना है कि ज़िन्दगी से जो कुछ भी हमने लिया है, वह उसे वापस लौटाना होता है. वही करने की कोशिश कर रहा हूं.
कैवल्य : किस महकमे में कार्यरत हैं आजकल ?
संजीव : उत्पादन विभाग में पिछले 13 वर्षों से कार्यरत हूं. वक़्त मिलता है तो चित्रकारी में लग जाता हूं.

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