स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. नीलगिरि लंगूरों की संख्या पिछले तीन वर्षों के दौरान चिड़ियाघरों में घटी है। वर्ष 2004-05 के दौरान देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में 28 नीलगिरि लंगूर थे। मैसूर और कोयंबटूर के चिड़ियाघरों में दो दो लंगूरों की विभिन्न बीमारियों से मौत हुई। मंत्रालय के पास इस बात की कोई रिपोर्ट नहीं है कि वनों में भी इस प्रजाति के लंगूरों की संख्या घटी है।

नीलगिरि लंगूर पश्चिमी घाट में पाया जाता है जो कर्नाटक के कोडागू से तमिलनाडु के पलानी पहाड़ी क्षेत्रों और केरल के भी कई पहाड़ी क्षेत्रों तक फैला है। इन लंगूरों के शरीर पर मुलायम काला फर होता है तथा उनके सिर पर सोने सा चमकीला भूरा फर होता है। इनकी लंबाई और पूंछ अन्य भूरे लंगूरों जैसी ही होती है। ये पांच से 16 के समूह में होते हैं। ये कृषि भूमि पर फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ये फल, अंकुर, और पत्ते खाते हैं। वनों की कटाई और फर और मांस के लिए शिकार होने की वजह से नीलगिरि लंगूर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं।



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