बिजली-पानी की समस्या से निजात नहीं !
चलो, वायदे कर देते हैं, ऐसी कोई बात नहीं !!
उपलब्धियां !
हम खरीदेंगे, हमें बस, रेट बतलाएं, मियां !!
राहजनी !
थाने की सप्ताह्जनी !!
फैसले !
जिसके भी हक़ में देने हों, पहले उससे कैश ले !!
लूट की योजना !
क्या पुलिस की योजना है, बस, यही है खोजना !!
सतर्कता !
ना भी अगर बरतते, तो क्या फर्क था ??
समस्याएं !
समाधान ना करने हेतु, हों तो, निश्चित हमें बताएं !!
पर्दाफ़ाश !
परदे के पीछे का सच भी, इसमें कहीं दीखता, काश !!
मनमानी !
करनी पड़ती है लोगों को, अगर पड़े सरकार चलानी !!
सूर्यग्रहण !
चन्द्रमा ने जब छुए, उसके चरण !!
चन्दा !
अपनी अर्थी का भी लेकर, निकल लिया नेताई बन्दा !!
-अतुल मिश्र
सुर्ख़ गुलाबों का दिन...
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मेरे महबूब!
आज रोज़ डे है... सुर्ख़ गुलाबों का दिन...महकती यादों का दिन...सोचती हूं कि
तुम्हें गुलाब कैसे भेजूं...तुम तो बहुत दूर हो... शायद तुम्हें याद भ...
