स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. 'जलवायु परितर्वन का समाज पर प्रभाव' जैसे ज्वलंत विषय पर आज यहां प्रधानमंत्री के विशेष दूत तथा मुख्य अतिथि श्याम सरन ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा आयोजित अठारहवीं वैज्ञानिक हिन्दी संगोष्ठी का उदघाटन किया। इस विषय की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु में निरंतर हो रहे बदलावों को संपूर्ण विश्व के जनसमुदाय द्वारा महसूस किया जा रहा है।

इस अवसर पर राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के सचिव बी.आर.परशीरा ने उपस्थित वैज्ञानिकों और जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परितर्वन जैसे सामयिक विषय पर हिन्दी में आयोजित इस संगोष्ठी से आम आदमी लाभान्वित होगा तथा राजभाषा हिन्दी का भी प्रचार-प्रसार हो सकेगा।

इस अवसर पर पिछले वर्ष 27 जनवरी को आयोजित की गई संगोष्ठी की कार्यवाही पर पुस्तक 'जलवायु परिवर्तन' का लोकार्पण भी किया गया।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव, डॉ. शैलेश नायक ने मुख्य अतिथि और सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय मौलिक पुस्तक लेख योजना, 2009 के विजेताओं को बधाई दी। इस योजना में प्रेमचंद श्रीवास्तव को उनकी पुस्तक 'हिन्द महासागर की समुद्री खनिज सम्पदा' के लिए 50000- रुपये का प्रथम पुरस्कार, डॉ. तारा देवी सिंह को उनकी पुस्तक 'हिन्द महासागर एवं राष्ट्र-एक भू-आर्थिक एवं भू-सामरिक अध्ययन' के लिए 40000- रुपये का द्वितीय पुरस्कार और प्रोफेसर मधुसूदन त्रिपाठी को उनकी पुस्तक 'सागर सम्पदा-महत्त्व एवं प्रबंधन' के लिए 30000- रुपये का तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। नकद पुरस्कार राशि के साथ-साथ इन तीनों विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं शील्ड भी प्रदान की गई।

इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संगठनों के कुल 14 वैज्ञानिकोंप्रोफेसरों ने भाग लिया और हिन्दी में लेख प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए 5000-, 4000- एवं 3000- रुपये के नकद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।

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