स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. वर्ष 2005 के दौरान देश में 1,46,800 टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा हुआ। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2012 तक यह बढ़कर 8 लाख टन हो जाएगा। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि मुम्बई, दिल्ली, बंगलुरू, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे, सूरत और नागपुर इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा करने वाले दस शीर्ष नगर हैं।
पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक कचरा सहित नुकसानदायक कचरे के समुचित प्रबंधन और आवाजाही के लिए नुकसानदायक कचरा (प्रबंधन, आवाजाही और सीमा-पार आवाजाही) नियमावली, 2008 अधिसूचित किया है। नियमानुसार इलेक्ट्रॉनिक कचरे की आवाजाही से जुड़ी सभी इकाइयों के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण कराना जरूरी है और नुकसानदायक कचरे को पंजीकृत अथवा अधिकृत पुनर्चक्रण करने वाले अथवा पुन: प्रसंस्कृत करने वाले अथवा पुन: उपयोग करने वाले के पास बेचा जाएगा। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के लिए मार्ग निर्देश जारी किए गए हैं।

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