वेदप्रताप वैदिक
भारत और पाकिस्तान के बीच बात हो या न हो, यह दुविधा अब खत्म हो गई है। बात जरूर होगी, क्योंकि दोनों पक्ष जरा नरम पड़ गए हैं। भारत यह नहीं कह रहा है कि हम सिर्फ आतंकवाद पर बात करेंगे और पाकिस्तान यह नहीं कह रहा है कि हम बात तभी करेंगे, जबकि ‘समग्र संवाद’ होगा, यानी हमारे लिए आतंकवाद के मुकाबले कश्मीर आदि ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

वास्तव में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने ताजातरीन बयान में कहा है कि बात नहीं करने का मतलब आतंकवादियों के जाल में फंसना है। कुरैशी के कथन पर हमें इसलिए विश्वास करना चाहिए कि आज पाकिस्तान अपने ही आतंकवादियों से जितना त्रस्त है, क्या वह त्रस्तता भारत के मुकाबले कम है? पिछले तीन-चार वर्षो में इस्लामी आतंकवादियों ने जितनी नृशंस वारदातें पाकिस्तान और अफगानिस्तान में की हैं, उन्होंने पाकिस्तान सरकार को मजबूर कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ दे। जैसा आक्रामक अभियान उसने वजीरिस्तान में चलाया, वैसा क्या हमें अपने देश के किसी क्षेत्र में चलाना पड़ा? जाहिर है कि पाकिस्तानी अभियान के पीछे अमेरिका का जबर्दस्त दबाव है, लेकिन अगर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी यह सोचते हैं कि भारत भी उसी दबाव में आकर उनसे बात करना चाहता है तो उनकी सोच सही नहीं है। भारत ने 1998 में जब समग्र संवाद की पहल की थी तो उसके पीछे प्रधानमंत्री वाजपेयी का वह विराट स्वप्न था, जिसके तहत वह संपूर्ण दक्षिण एशिया को 21वीं सदी के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन पाकिस्तान ने कभी करगिल युद्ध, कभी संसद पर हमला और कभी मुंबई रेल बम कांड के द्वारा उस पहल में रोड़े अटका दिए।

डॉ. मनमोहन सिंह उसी सूत्र को बड़े जोर-शोर से आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन नवंबर 2008 में मुंबई के ताज होटल कांड ने सारी तैयारी पर पानी फेर दिया। फिर भी जुलाई 2009 में अपने देश और पार्टी का गुस्सा झेलते हुए उन्होंने शर्म अल शेख में शिखर बैठक की सहमति दी। उसके बावजूद कई माह बीत गए और पाकिस्तान ने मुंबई कांड के अपराधियों के विरुद्ध कोई उल्लेखनीय कार्रवाई नहीं की। अब जबकि उसने कार्रवाई शुरू कर दी है तो भारत खुले दिल से बात करने को राजी हुआ है। पाकिस्तान को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि यह बातचीत अमेरिका के कारण नहीं, पाकिस्तान के कारण शुरू हो रही है। यदि इस मुद्दे पर उसकी समझ उलटी होगी तो यह बातचीत भी उलट जाएगी। इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा। इसमें शक नहीं है कि इस बातचीत के लिए अमेरिका दोनों पक्षों को निरंतर ‘प्रोत्साहित’ करता रहा है और अब उसने प्रसन्नता भी जाहिर की है, लेकिन जब तक दोनों पक्ष पूर्ण स्वायत्त होकर अपने मामले नहीं सुलझाएंगे, यह संवाद भी बांझ ही साबित होगा।

यह संवाद बहुत ही पतली डोरी पर होने वाला नट नृत्य है। वह डोरी कब टूट जाएगी, कुछ पता नहीं। ताज होटल जैसा कोई छोटा-मोटा हादसा भी दुबारा हुआ नहीं कि पूरा भारत इस तरह के संवाद के विरुद्ध उबल पड़ेगा। लोकतांत्रिक सरकार फिर ठिठक जाएगी। ऐसे में दोनों पक्षों को आतंकवाद के विरुद्ध शक्तिशाली संयुक्त मोर्चे का निर्माण करना होगा। दोनों को घोषणा करनी होगी कि आतंकवाद दोनों का साझा शत्रु है। एक पर हुआ हमला दूसरे पर हुआ हमला माना जाएगा और जरूरत पड़ी तो इस जन-शत्रु के विरुद्ध दोनों राष्ट्रों की फौजें साझा अभियान चलाएंगी। इस समझ को हमें अफगानिस्तान तक फैलाना होगा और यदि भारत, पाक और अफगान, ये तीनों सेनाएं मिलकर काम करें तो 10 हजार तालिबान का मूलोच्छेद करने में कितना समय लगेगा? यदि पाकिस्तान मेरे इस सुझाव पर अमल करने को तैयार हो जाए तो उसे इतने फायदे होंगे कि उन्हें शब्दों में गिनाना कठिन हो जाएगा।

पहला फायदा तो यही है कि सारी दुनिया बिना समझाए ही यह बात मान लेगी कि पाकिस्तान सचमुच तालिबान के विरुद्ध है। अभी तक लोग यह मानते हैं कि पाकिस्तान की सरकार सिर्फ उन तालिबान के विरुद्ध है, जो उसे तंग करते हैं। वह उन तालिबान के विरुद्ध नहीं है, जो भारत और अफगानिस्तान के दुश्मन हैं। इस छवि के साफ होते ही पाकिस्तान सरकार का रुतबा अपने ही देश में बहुत ऊंचा हो जाएगा। अभी माना जाता है कि पाकिस्तान की राजनीतिक सरकार में कोई दम नहीं है। उसकी बात पर क्या भरोसा किया जाए। असली ताकत तो फौज और आईएसआई के पास है। वे दोनों भारत और अफगान विरोधी तालिबान के सरपरस्त हैं। यदि भारत-पाक-अफगान संयुक्त मोर्चा बन जाए तो फौज और आईएसआई को या तो राजनीतिक सरकार के आगे झुकना पड़ेगा या उसका खुलकर विरोध करना होगा। यानी पर्दा हट जाएगा। राजनीतिक चिलमन चीर-चीर हो जाएगा।

आतंकवाद विरोध के बहाने दोनों राष्ट्र इतने नजदीक आ जाएंगे कि फिर ‘समग्र संवाद’ अपने आप चलेगा और दोनों तरफ से चलेगा। कश्मीर, सियाचिन, पानी के बंटवारे, परमाणु-सावधानियां और आर्थिक-सांस्कृतिक सहयोग के अनेक नए आयाम अपने आप खुलेंगे। जनरल कयानी अफगानिस्तान में अब भी ‘सामरिक पिछवाड़े’ की जो रट लगाए हुए हैं, वह निर्थक हो जाएगी। इधर, भारत-पाक सहयोग बढ़ा नहीं कि अफगानिस्तान अपने आप शांत होने लगेगा। उस स्थिति में पाकिस्तान को ‘सामरिक पिछवाड़े’ की जगह नए-नए ‘आर्थिक सीमांतों’ की खोज करनी होगी और ये नए सीमांत फिर अफगानिस्तान तक सीमित नहीं रहेंगे। ये ईरान और तुर्की और उनके उत्तर में बसे पांचों मध्य एशियाई गणतंत्रों तक फैलेंगे। जाहिर है कि इनका लाभ उठाने की पूर्ण क्षमता पाकिस्तान में तभी विकसित होगी, जब वह भारत को अपने साथ लेगा। भारत और पाकिस्तान मिलकर पूरे एशिया का नक्शा बदल सकते हैं।

भारत और पाकिस्तान को साथ आने का इससे बढ़िया मौका पहले कभी नहीं मिला था। अगले डेढ़ साल में अमेरिका अफगानिस्तान को खाली करेगा। एक बार उसने काबुल छोड़ा तो अफगानिस्तान उसकी बला से! उसके शून्य को कोई भी भरे, उसे क्या चिंता है? यदि भारत और पाकिस्तान काबुल में नया अखाड़ा खोल लें तो अमेरिका का क्या बिगड़ रहा है? दोनों लड़ेंगे, दोनों का नुकसान होगा। शायद चीन और रूस भी इस फटे में अपने पांव फंसा लें। यदि पाकिस्तान इस कीचड़ में नहीं उलझना चाहता है, तो यही सही वक्त है जबकि उसे भारत से हाथ मिलाना चाहिए। भारत को भी पाकिस्तान के दिल में यह बात जमानी होगी कि वह उसका जरा-भी नुकसान नहीं होने देना चाहता है और अफगानिस्तान आदि क्षेत्रों में उसके जो भी वैध और उचित हित हैं, उन्हें वह मान्यता देता रहेगा। यदि हमारे विदेश सचिवों की बैठक में तात्कालिक मुद्दों के अलावा इस दूरगामी संभावना पर भी काम हो, तो दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे मालदार और सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में बदलने लगेगा।

0 Comments

Post a Comment

मौसम

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

आज का दिन

आज का दिन
22 रबी अल-अव्वल, हिजरी सन् 1431, 10 मार्च 2010 बुधवार. तिथि संवत : चैत्र कृष्ण दशमी, संवत् 2066, शाके- 1931, रवि उत्तरायने, वसंत ऋतु. सूर्योदय कालीन नक्षत्र : पूर्वाषाढ़ा अपराह्न् 4.12 तक, पश्चात उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वरियान योग तथा विष्टि करण. ग्रह विचार : सूर्य, बुध, गुरु-कुंभ, शुक्र-मीन, केतु-मिथुन, मंगल-कर्क, शनि-कन्या तथा चंद्र, राहु-धनु में. चौघड़िया मुहूर्त : प्रात: 6.40 से 8.09 तक लाभ, प्रात: 08.09 से 9.39 तक अमृत, प्रात: 11.08 से 12.37 तक शुभ, अपराह्न् 3.35 से 5.04 तक चंचल, सायं 5.04 से 6.34 तक लाभ, रात्रि 9.35 से 11.06 तक अमृत. राहुकाल : दोपहर 12.37 से 2.06 तक. शुभ अंक- 9, शुभ रंग- गुलाबी

कैमरे की नज़र से...

इरफ़ान का कार्टून कोना

इरफ़ान का कार्टून कोना
To visit more irfan's cartoons click on the cartoon

बजट-2010-2011

ई-अख़बार

Blog

किस तरह की ख़बरें चाहते हैं

Search