ईश्वर धामु
चंडीगढ़. हरियाणा में ऐलनाबाद का उप चुनाव सम्पन्न हुआ और सत्तासीन कांग्रेस चुनाव हार गई। विजयी रहे इनेलो के अभय चौटाला ने विधायक पद की शपथ भी ग्रहण कर ली। सत्ता और विपक्ष द्वारा आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी अब थम गया, परन्तु पूरा माहौल सामान्य से कहीं उपर-नीचे चल रहा है। सत्ता में भागीदार विधायकों के चेहरों पर से आत्मविश्वास और चमक गायब है। ऐलनाबाद उप चुनाव से पहले मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के चेहरे पर एक खुशी की झलक एक बार तो दिखाई पड़ी थी पर चुनाव परिणाम आने के बाद अब उनके चेहरे पर हंसी चिपकाई हुई-सी लगती है। पार्टी और सत्ता का आंतरिक दबाव का प्रभाव मुख्यमंत्री के चेहरे पर साफ नजर आ रहा है। संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी हुड्डा को उनके राजनैतिक विरोधियों ने घेरे रखा। दूसरी ओर उनके मंत्रिमंडल के साथी भी खुश नहीं हैं। जिन विधायकों को मंत्री बनाए जाने का आश्वासन दिया हुआ था, उनको सत्ता में हिस्सेदारी तो मिली पर उनके राजनैतिक कद से कहीं छोटी। मंत्रियों द्वारा की जा रही टिक्का टिप्पणियों से साफ है कि वें अपना विरोध प्रकट करने का मौका नहीं गंवाते। पिछले दिनों जंहा पूरा देश अपना राष्ट्रीय पर्व मना रहा था, वहीं हरियाणा का सैनिक मुख्य संसदीय सचिव अपनी सरकार गाड़ी छोड़ कर अपनी नाराजगी जता रहा था। दो दिन बाद राजनैतिक भाषा में सब ठीक है, कहा जाने लगा। कहते हैं कि इस मुख्य संसदीय सचिव का विरोध यह था कि उनके गृह जिले का डीसी उसकी सिफारिश को दर किनार कर चल रहा था। इस सैनिक नेता ने जब अपने एक समर्थक की शिकायत को रफादफा करने को डीसी से कहा तो डीसी ने उस पर केस ही दर्ज करवा दिया। कहते हैं कि इस पर गुस्साएं मुख्य संसदीय सचिव ने सरकारी गाड़ी त्याग कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी । इसी तरह के अनेक घटनाएं हैं, जो साफ करती हैं कि मंत्रिमंडल में आपसी तालमेल का अभाव और नेताओं में रोष है। एक मंत्री ऐसा भी है, जो मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से गायब रहता है। पार्टी बैठकों में भी इसकी कोई रूचि नहीं है। इसका कहना है कि राजनीति में अपना हक किसे मिलता है? अपने परम्परागत चुनाव क्षेत्र से कोसों दूर बदली संस्कृति के क्षेत्र से जीत कर उन्होंने तो एक मिसाल बना दी पर पार्टी ने उन्हे क्या दिया? इससे बड़ा राजनैतिक रूप से अन्याय ओर क्या हो सकता है कि मुख्य संसदीय सचिवों के पास काम की कमी है । सरकारी फाईलें उनके यंहा से होकर नहीं जाती। एक मुख्य संसदीय सचिव तो अपना स्वतंत्र कार्यभार वाला महकमा ही देख रहे हैं। उनको दिया गया सम्बंधित दूसरा विभाग के काम वें इसलिए नहीं कर रहे कि उस विभाग का कैबनेट मंत्री है और किसी के मातहत रह कर इनकी काम करने की आदत नहीं है।
कांग्रेस के ऐसे नेता जिनको चुनाव में टिकट नहीं मिला, उनको लाल बत्ती का बेसब्री से इंतजार है। लाल बत्ती की चाह रखने वाले अपने राजनैतिक आकाओं के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं लाल बत्ती के इंतजार में बैठे नेताओं ने योतिषियों की शरण भी पकड़ी है । कहते हैं कि एक नेता ने किसी योतिषि के कहने पर दाढ़ी बढ़ा ली है तो दूसरे एक ने एक विशेष रंग के कपड़े -जूतें पहने शुरू कर दिए हैं। एक दिग्गज कांग्रेसी ने तो राजनैतिक लाभ का पद हासिल करने के लिए अनुष्ठान भी करवाया है । लेकिन लाल बत्ती चाहने वाले नेताओं को अभी मुख्यमंत्री के सांसद पुत्र की शादी का इंतजार है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने बेटे की शादी के बाद बोर्ड-निगमों के चेयरमैन बनाने की सूचि को लेकर अला कमान से समय लेंगे। लगता है कि मुख्यमंत्री अपने बेटे की शादी के बाद कुछ नेताओं की निराशा दूर करेंगे। कांग्रेस के उच्च सूत्रों ने बताया है कि मुख्यमंत्री ने जिन 23 लोगों की लाभ पद देने के लिए सूचि बनाई थी, उसी पर विचार कर पहले चरण में नाम तय किए जाएंगे।

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