सरफ़राज़ ख़ान
हिसार (हरियाणा). राज्य कृषि विभाग के वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव रोशन लाल ने प्रदेश में कृषि के विकास के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नए अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के कृषि विकास के लिए चलाई गई राष्ट्रीय कृषि मिशन, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि योजनाओं में हरियाणा को आगामी वित्त वर्ष में ज्यादा  अनुदान मिलने की संभावना है। इसलिए उन्हें कृषि शोध को गति देने के लिए जल्द नए अनुसंधान प्रस्ताव सरकार को सौंपने चाहिएं।

रोशन लाल आज यहां हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि अधिकारी कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आगामी खरीफ मौसम की फसलों के लिए सिफारिशें तय करने के लिए आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश कृषि विभाग के अधिकारी तथा ह.कृ.वि. के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र का विकास सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। यह राय सरकार की योजनाओं तथा नीतियों का परिणाम है कि गत वर्ष प्रदेश में कम वर्षा होने के बावजूद यहां धान का तीन लाख टन यादा उत्पादन हुआ है जिसकी केन्द्र सरकार ने भी सराहना की है। उन्होंने कहा इस वर्ष सभी प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन लक्ष्य में वृध्दि की गई है। उन्होंने कहा कि कपास में 25 लाख बेल, बाजरा में डेढ़ लाख टन, धान में तीन लाख टन यादा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे चुनौती बताते हुए कहा कि कृषि अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों को इसके लिए सघन प्रयास करने होंगे।

उन्होंने नए अनुसंधानों को सभी किसानों तक पहुंचाए जाने पर जोर दिया। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में विस्तार कार्र्यकत्ता केवल 40 प्रतिशत किसानों तक ही पहुंच पाए हैं। उन्होंने कहा नए अनुसंधानों का कोई अर्थ नहीं यदि उनका लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंचता है। उन्होंने प्रदेश में गन्ने की खेती को बढ़ाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा गन्ने के तहत क्षेत्र 1.40 लाख हैक्टेयर से घटकर करीब आधा रह गया है। उन्होंने तिलहनों तथा दलहनों का प्रदेश में उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को सिंचित क्षेत्रों के लिए इनकी उपयुक्त किस्में विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कृषि में सिंचाई जल की बचत के लिए टपका सिंचाई विधि तथा कृषि उत्पादों के नुकसान को कम करने के लिए पोस्ट हार्वेस्ट तकनालोजी पर जोर दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के.एस. खोखर जो इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे, ने संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान में पूंजीनिवेश को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा अनुसंधान में किए गए निवेश का लागत व लाभ अनुपात बहुत अधिक प्राप्त होता है। उन्होंने प्रदेश द्वारा खाद्यान्नों में अर्जित की गई उपलब्धि के लिए कृषि विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा सरकार को उनसे बहुत उम्मीद है इसलिए उन्हें इस दिशा में सदा प्रयत्नशील रहना चाहिए। उन्होंने कृषि में शोध को गति देने के लिए सरकार से विश्वविद्यालय के लिए और यादा आर्थिक व मानव संसाधन जुटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृतियों तथा भर्तियों पर लगे प्रतिबंध्द के चलते विश्वविद्यालय में अनुसंधान कार्यक्रमों में गतिरोध पैदा हो गया है। उन्होंने कहा सरकार को कम से कम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की परियोजनाओं में वैज्ञानिकों की रिक्तियां भरने की अवश्य अनुमति दे देनी चाहिए क्योंकि इससे सरकार पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।

कुलपति ने कृषि में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता जताई और जल व उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा इसके लिए किसानों को इज़राईल की तर्ज पर खेती प्रणाली में बदलाव करने होंगे।

प्रदेश कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. बी.एस. दुग्गल ने कहा कि सरकार द्वारा खरीफ फसलों के निर्धारित किए गए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के पास खरीफ फसलों का करीब ढाई हज़ार टन बीज उपलब्ध है। उन्होंने कहा फसलों की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ सिंचाई जल की बचत के भी प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. आर.पी. नरवाल ने गत वर्ष खरीफ फसलों पर किए गए अनुसंधान का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने ग्वार, बाजरा, कपास आदि की विश्वविद्यालय में हाल ही में विकसित की गई नई किस्मों के गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन किस्मों को प्रदेश में बिजाई के लिए जारी कर दिया गया है। उन्होंने ह.कृ.वि. में विभिन्न खरीफ फसलों के गत वर्ष उत्पादित बीज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खरीफ फसलों का 80 क्विंटल न्यूक्लियस तथा 287 क्विंटल प्रजनक बीज के अतिरिक्त गन्ने की विभिन्न किस्मों का 6340 क्विंटल प्रजनक बीज तैयार किया गया है।

इससे पूर्व विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एच.डी. यादव ने किसानों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न विस्तार शिक्षा कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा हमारी कौशिश फसलों की पैदावार के अंतर को कम करने की है। कार्यक्रम को कृषि कालेज के डीन डॉ. एस.एस. पाहुजा तथा डॉ. जे.एस. धनखड़ ने भी संबोधित किया। इस कार्यशाला में आगामी खरीफ मौसम के लिए कृषि की सिफारिशें तय करने से पूर्व प्रदेश में खरीफ फसलों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

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