कल सहर पे, यक़ीं उठ गया

Posted Star News Agency Saturday, February 27, 2010

कल सहर पे, यक़ीं उठ गया
हर पहर पे, यक़ीं उठ गया

हर सुबह हम, मरे इस कदर
दोपहर पे, यक़ीं उठ गया

वो डगर तेरे घर की ही थी
जिस डगर पे, यक़ीं उठ गया

जो ना तट से मिली आज तक
उस लहर पे, यक़ीं उठ गया

ऐसे धोखे मिले, उम्र भर
हमसफ़र पे, यक़ीं उठ गया

जब तहद में चली शायरी
तो बहर पे, यक़ीं उठ गया

आदमी का ज़हर देखकर
अब ज़हर पे, यक़ीं उठ गया

हम रहे बेखबर, इसलिए
कल ख़बर पे, यक़ीं उठ गया

राम-अल्लाह, जब लड़ पड़े
इस शहर पे, यक़ीं उठ गया
-अतुल मिश्र

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1 अगस्त 2010, रविवार, 10 श्रावण (सौर) शक 1932, श्रावण मास 17 प्रविष्टे 2067, 19 शाबान सन हिजरी 1431, श्रावण कृष्ण षष्ठी रात्रि 8 बजकर 37 मिनट तक उपरान्त सप्तमी, रेवती नक्षत्र रात्रि 2 बजकर 1 मिनट तक तदनन्तर अश्विनी नक्षत्र, धृति योग रात्रि 4 बजकर 11 मिनट तक पश्चात शूल योग, गर करण, चन्द्रमा रात्रि 2 बजकर 1 मिनट तक मीन राशि में उपरान्त मेष राशि में. पंचक समाप्त रात्रि 2 बजकर 2 मिनट पर. तिलक स्मरणोत्सव दिवस. रवि षष्ठी. सूर्य दक्षिणायन. सूर्य उत्तर गोल. वर्षा ऋतू . सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक राहु काल. सूर्य : कर्क राशि में, चंद्रमा : मीन राशि में, बुध : सिंह राशि में, शुक्र : सिंह राशि में, मंगल : कन्या राशि में, वृहस्पति : मीन (वक्री) राशि में, शनि : कन्या राशि में, राहु : धनु राशि में, केतु : मिथुन राशि में. (ज्योतिषाचार्य वेदप्रकाश जाबाली)

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