स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. राजस्थान के लोक जीवन पर पत्रकार पृथ्वी परिहार की पुस्तक थार की ढाणी का लोकार्पण आज 19वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में आयोजित एक समारोह में हुआ। मुख्य अतिथि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के प्रोफेसर राम बक्ष ने प्रकाशन विभाग, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से प्रकाशित इस पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. राम बक्ष ने प्रकाशन विभाग, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि विलुप्त होती जा रही सांस्कृतिक और लोक ज्ञान की धरोहर को संभालने और अभिलेखित करने की सख्त जरूरत है। राजस्थान में फैले थार के रेगिस्तान में खेतों में बसे घरों को ढाणी कहते हैं जो इस सामाजिक संरचना की सबसे छोटी इकाई है। पुस्तक में ढाणियों के बहाने रेगिस्तान के कठिन इलाके में जीवन और संस्कृति के फलने-फूलने का रोचक ब्यौरा है। करीब 95 पृष्ठों की पुस्तक की कीमत 70 रूपए है। हाल के तकनीकी बदलावों से इस मरूस्थल में लोगों के जीवन में जो महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, उन्हें भी इस पुस्तक में महत्वपूर्ण ढंग से दर्ज किया गया है।
इस अवसर पर लोक संस्कृति और वैश्वीकरण विषय पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें वरिष्ठ लेखक पत्रकार और सामाजिक चिंतक राजकिशोर तथा लेखक और राजस्थान के जानकार भुवनेश जैन प्रमुख वक्ता थे।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रकाशन विभाग की अपर महानिदेशक (प्रभारी) ने बताया कि विभाग ने देश के विभिन्न भागों की विविध लोक कलाओं और संस्कृतियों पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। बच्चों के लोक साहित्य पर इसकी पुस्तकों की श्रृंखला के रूप में प्रकाशन विभाग ने आने वाली पीढ़ियों के लिए जैसे एक धरोहर को संभाल कर रखा है।

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