प्रदीप श्रीवास्तव
लगभग चार लाख की आबादी वाले निज़ामाबाद शहर में स्थित है नील कंठेश्वर यानि भगवन शिव जी का विशाल मंदिर. बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 14 सौ पुराना है. जो जैन एवं आर्यों की शिल्प कला को अपने में समेटे हुए है. कहतें हैं कि शातवाहनकल के द्वितीय राजा पुल्केशी द्वारा जैन धर्म स्वीकार लिए जाने के कारण इस मंदिर को जैन मंदिर के रूप में विकसित किया गया. वहीं पुराणों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है. कहते हैं कि काकतिया वंश के राजाओं ने बाद में इस मंदिर कों शिवालय के रूप में स्थापित किया. किवदंती है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग भगवन विष्णु कि से प्रकट हुआ था. इस लिए इसे नील कंठेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है.लगभग तीन एकर के विशाल क्षेत्र में बने मंदिर के परिसर में कुंड के अलावा हनुमानजी, मां पार्वती, गणेश भगवान, विट्ठल भगवान के मंदिरों के साथ ही पंचवटी अर्थात पीपल,नीम, बड़ ,गुलेर एवं जंबी के विशाल पेड़ हैं. इन पांचों पेड़ों को संतान वृक्ष के रूप में मना जाता है. किवदंती है कि निः:संतान दंपत्ति यदि इन पेड़ों की परिक्रमा कर ले तो उसकी मनोकामना पूरी होती है. संतान के साथ-साथ उसे धन व यश भी मिलता है. महाशिवरात्रि के अवसर लाखों भक्त बाबा भोले नाथ के दर्शन के पुन्य प्राप्त करते हैं.
कैसे पहुंचे : निज़ामाबाद सिकंदराबाद-नांदेड़ मार्ग पर स्थित है. जो रेल सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद (200 किलोमीटर) एवं नांदेड़ (130 किलो मीटर) है.
सिकंदराबाद, नांदेड़, आदिलाबाद से सरकारी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं.
कहां रुकें : निज़ामाबाद में सरकारी विश्राम गृह के अलावा होटल भी हैं.
क्या देखें : निज़ामसागर, अशोक सागर, कोलास किला. दिचपल्ली का रामालय के अलावा 40 किलोमीटर दूर में सरस्वती जी का विशाल मंदिर, जो बासर में स्थित है.

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