स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की जरूरत को महत्त्व नहीं देना और उन क्षेत्रों में जन स्वास्थ्य की समस्या के समाधान के प्रति अनिच्छा होना इस स्थिति में मददगार नहीं होगा। अंतर-स्नातक चिकित्सा शिक्षा के वैकल्पिक प्रारूप विषय पर चर्चा के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रस्तावित ग्रामीण औषधि और शल्य चिकित्सा स्नातक (बीआरएमएस) पाठयक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में जन स्वास्थ्य के लिए एक समुदाय आधारित समाधान के बारे में पहली बार चर्चा की जा रही है।
उन्होंने इस आशंका को दूर करते हुए कहा कि यह पाठयक्रम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम एमबीबीएस अथवा विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थान पर इन्हें नहीं ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव में मेधाविता के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया गया है, ताकि उन्हें प्राथमिक रूप से 1,45,000 उपकेन्द्रों में अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में काम करने के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रशिक्षित लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एमबीबीएस चिकित्सकों के अतिरिक्त होंगे। फिलहाल आशा के बाद सहायक दाई (एएनएम) की देखरेख में जन स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे आधारभूत इकाई उप केन्द्र काम कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए उपाय भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय चिकित्सा परिषद से इस पर कड़ी नजर रखते हुए इसके लिए वार्षिक लाइसेंस प्रक्रिया स्थापित करने को कहा।

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