होली तो अब सामने खेलेंगे सब रंग।
महंगाई ऐसी बढ़ी फीका हुआ उमंग।।

पैसा निकले हाथ से ज्यों मुट्ठी से रेत।
रंग दिखे ना आस की सूखे हैं सब खेत।।

एक रंग आतंक का दूजा भ्रष्टाचार।
सभी सुरक्षा संग ले चलती है सरकार।।

मौसम और इंसान का बदला खूब स्वभाव।
है वसंत पतझड़ भरा आदम हृदय न भाव।।

बना मीडिया आजकल बहुत बड़ा व्यापार।
खबरों के कम रंग हैं विज्ञापन भरमार।।

रंग सुमन का उड़ गया देख देश का हाल।
जनता सब कंगाल है नेता मालामाल।।
-श्यामल सुमन

1 Responses to होली तो अब सामने खेलेंगे सब रंग

  1. नीले पीले ये सुर्ख से सुर्ख रंग, ये अबीर
    सब छूट जाते हैं, झट से
    सो रंगना ही है मुझे, तो
    उस रंग से रंगो
    जो छुटाये से बढ़े
    कहाँ छिपा रखी है
    नेह की पिचकारी और प्यार का रंग?

     

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