स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. गंगा कार्य योजना से गंगा नदी की जल गुणवत्ता में कुछ सुधार के संकेत हैं। राज्यों में गंगा कार्य योजना के माध्यम से कोषों और परिसम्पत्तियों के उपयोग पर मई, 2009 में योजना आयोग द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार जल गुणवत्ता जांच विख्यात स्वतंत्र संस्थानों द्वारा की गई। वर्ष 1986 से 2008 के दौरान गंगा नदी के 16 निगरानी केन्द्रों पर की गई जल जांच में दो केन्द्रों के अलावा सभी केन्द्रों में जैव रसायन आक्सीजन मांग (बीओडी) में कमी दर्शाते हुए जल गुणवत्ता में सुधार के संकेत मिले। हालांकि इन 16 केन्द्रों में से 7 में बीओडी स्तर स्नान मानकों के अनुरूप नहीं था। 4 स्थानों पर विघटित आक्सीजन के स्तर में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के अंतर्गत निर्मित सीवेज प्रबंधन ढांचे के बिना स्थिति बेहद दयनीय हो जाएगी। तीर्थस्थलों पर तीर्थ यात्रियों के स्नान के कारण विशेषतौर पर कोलिफॉर्म की गणना में वृध्दि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार जल की गुणवत्ता को प्रभावित होने के कई कारण है जिसमें घरेलु सीवेज और सीवेज प्रबंधन क्षमता में दूरी, नदियों के किनारे औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाला अपरिष्कृत कचरा, बिजली आपूर्ति की कमी के कारण सीवेज प्रबंधन संयंत्रों के कार्य में बाधा, घरेलू सीवेज नीतियों और एसटीपी के बीच जुड़ाव की कमी और एसटीपी की मरम्मत लागत को प्रदान करने में राज्यों की असमर्थता आदि शामिल हैं।

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