फ़िरदौस ख़ान
नई दिल्ली. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों बुरी तरह शिकस्त खाई भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक तौर पर काफ़ी फर बदल किए जाते रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि भाजपा ने हार से कोई सबक नहीं सीखा है. भाजपा यह नहीं सीखी कि जनता को धर्म के नाम पर गुमराह करके सत्ता हासिल नहीं की जा सकती. हालांकि लोकसभा चुनावों में भाजपा की शर्मनाक हार के लिए पार्टी के नेता खुद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हस्तक्षेप को ज़िम्मेदार बता रहे थे. पार्टी नेताओं का मानना था कि भाजपा को अगर फिर से सत्ता में लाना है तो पार्टी को आरएसएस से दूरी बनानी होगी. मगर अब नितिन गडकरी ने अपनी नई टीम को देखकर लगता है कि भाजपा आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चल रही है. भाजपा की नई टीम में आरएसएस के प्रचारकों और संघ मानसिकता के लोगों शामिल कर जनता को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भाजपा अपने हिदुत्व के एजेंडे को कभी नहीं छोड़ सकती. मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने पर वरुण गांधी के बयानों पर लगाम लगाने की बात कहने वाले भाजपा के मुस्लिम मुखौटे शाहनवाज़ हुसैन को प्रवक्ता बनाया गया है. हालांकि शाहनवाज़ हुसैन महासचिव पद चाहते थे, लेकिन संघ ने ऐसा होने नहीं दिया. इसलिए शाहनवाज़ हुसैन को इसी पद से संतोष करना पड़ा.

इस टीम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को लगातार दूसरी बार उपाध्यक्ष बनाया गया है. भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकीं करुणा शुक्ला संगठन योग्य होने के साथ मिलनसार और मृदुभाषी मानी जाती हैं. अभिनेत्री हेमा मालिनी को उपाध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. वह विभिन्न चुनावों में पार्टी के लिए जमकर प्रचार करती रही हैं. साथ ही राज्यसभा में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी उन्हें किसी न किसी रूप में जोड़ा रखना चाहती है. इसी बात को ध्यान में रखकर उन्हें यह पद सौंपा गया है. वाजपेयी सरकार में जल संसाधन राज्यमंत्री रहीं बिजोया चक्रवर्ती को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है. पेशे से शिक्षाविद बिजोया चक्रवर्ती राज्यसभा में भी उपनेता रहीं हैं. उन्होंने असम से पार्टी के लिए काम किया है. इसके अलावा उन्हें संसद की विभिन्न समितियों में काम करने का लंबा अनुभव है.

पार्टी अध्यक्ष गडकरी के विश्वासपात्र माने जाने वाले पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई है. पार्टी को उम्मीद है कि प्रमोद महाजन के बाद पीयूष गोयल भी पार्टी के लिए संसाधन जुटाने में कामयाब रहेंगे. काबिले-गौर है कि उनके पिता वेदप्रकाश गोयल भी पार्टी कोषाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं. हिमाचल के पूर्व मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को महासचिव बनाया गया है. वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के नजदीकी माने जाते हैं. उनके महासचिव बन्ने से जेटली विरोधी तबका गडकरी से नाराज़ है. भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष धर्मेद्र प्रधान को भी महासचिव पद का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है. वह उड़ीसा से निर्वाचित होकर पिछली लोकसभा में बहुत सक्रिय रहे थे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक राम लाल को भी महासचिव बनाया गया है. वह पिछले पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की टीम के सदस्य रहे हैं. सौदान सिंह और वी. सतीश के साथ इन्हें भी आरएसएस की नियुक्ति के रूप में देखा जा रहा है. काबिले-गौर है कि भाजपा में आरएसएस से आए प्रचारकों की तूती बोलती है. राजनाथ की टीम में भी सह संगठन सचिव रहे सौदान सिंह को संयुक्त महासचिव (संगठन) बनाया गया है. छत्तीसगढ़ में भाजपा को दो बार सत्ता में लाने और पार्टी संगठन को एकजुट रखने में उनकी अहम भूमिका रही है. राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य निर्मला सीतारमन को प्रवक्ता बनाया गया है. कानून विषय की जानकार निर्मला सीतारमन आंध्र प्रदेश से हैं, लेकिन वहां पार्टी की स्थिति बेहद कमज़ोर है.

भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष व राजसमंद से राजस्थान विधानसभा की सदस्य। किरण माहेश्वरी को सचिव बनाया गया है. वह उदयपुर से सांसद रह चुकी किरण माहेश्वरी वसुंधरा राजे की विरोधी रही हैं. राजनाथ सिंह की टीम में भी राष्ट्रीय सचिव रही सरोज पांडे को सचिव पद का दायित्व दिया गया है. वे छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम की दो बार मेयर रह चुकीं सरोज पांडे प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता भी रहीं हैं. वह वैशालीनगर से विधायक बनीं और फिर दुर्ग से लोकसभा सांसद भी चुनी गईं. गडकरी के विश्वासपात्र माने जाने वाले पूर्व सांसद किरीट सोमैया को भी सचिव पद सौंपा गया है. स्वदेशी जागरण मंच के पूर्व अध्यक्ष मुरलीधर राव को भी बनाया गया है. पहले वह संघ में रहे हैं. फिर राजनीति करने का शौक उन्हें भाजपा में ले आया. पिछली लोकसभा में अरुणाचल (पूर्व) से सांसद तापिर गाओ को सचिव बनाया गया है. मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने में माहिर वरुण गांधी को सचिव बनाया गया है. एक समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ आग उगलने के लिए यह पद उनका इनाम माना जा रहा है. दिल्ली की पूर्व मेयर आरती मेहता को सचिव बनाया गया है. भाजयुमो की उपाध्यक्ष रही वाणी त्रिपाठी को भी सचिव पद दिया गया है.

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