संदीप माथुर
मथुरा (उत्तर प्रदेश). चाहे गंगा हो या यमुना लोगों की आस्था का केंद्र बिंदु और धार्मिक महत्व की इन नदियों में लाख प्रयासों के बावजूद प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ ही रहा है। यही वजह है कि नदियां नालों में तब्दील हो चुकी है और इनके जलस्तर में आक्सीजन की मात्रा दिन पर दिन घट रही है।यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये मान बिहारी ट्रस्ट और एन आर आई भाइयों की पहल रंग लाई है। शुध्दीकरण और आक्सीजन की घटती मात्रा को बढ़ाने के लिए यहां पहला एरिएटर लगा है। देश ही नही विश्व में पहली बार कान्हा की नगरी को ये गौरव प्राप्त हुआ है।

यमुना में प्रदूषण दिन प्रति दिन लाख दावों के बावजूद बढ़ रहा है और दूर दूर से आए श्रध्दालु पतित पावनी यमुना का ये हाल देख कुठित हैं, लेकिन इसके जिम्मेदार हम और आप भी हैं।पानी मे लगातार आक्सीजन की कमी से जलचर भी नही बचे है। इसी सोच ने एस.एल.झा को साचने पर मजबूर कर दिया और एक साल तक कड़ी मेहनत और उनकी टीम की रिसर्च सफल हुई जब उनके इस प्रोजेक्ट को मान बिहारी ट्स्ट और उससे जुड़े एन.आर.आई भाइयों के सहयोग से पहला एरिएटर मथुरा में लगा। पानी मे आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने और उसके षुध्दीकरण में सेल्फ पावर वाला एरिएटर जो पानी के बहाव मे स्वचलित है। इसके ईर्द गिर्द दो पम्प जो पानी के अन्दर हवा के बुलबुले पैदा कर आक्सीजन की मात्रा को 20 प्रतिषत आक्सीजन बढ़ा देते हैं।

ये एरिएटर स्वचलित है और हर 24 घंटे में 80 केजी आक्सीजन पानी में डिसाल्व करेगी और पानी के बहाव बढ़ने पर ये तीन गुना आक्सीजन बढ़ा सकेगी। ये ऐसा सिस्टम है जिसमें बिजली की कोई ज़रूरत नहीं लगभग 500 किलो वजनी इस एरिएटर की कीमत लगभग 60 हजार से 65 हजार है, लेकिन बड़ी संख्या मे इसके निर्माण पर इसकी कास्ट महज 30 से 35 हजार तक आ जाएगी। जहां करोड़ों रुपए खर्च करने और वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट के बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा वही उसके मुकाबले ये एरिएटर सफल है। पूरे मथुरा में यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ऐसे लगभग एक हजार एरिएटरर्स की जरूरत है।

यमुना के शुध्दीकरण के लिए मान बिहारी ट्रस्ट और एन.आर.आई की ये पहल निष्चित रूप से सराहनीय है प्रदूषण को लेकर यदि हम और आप जागरूक हो जाए तो मोक्षदायिनी प्रदूषण मुक्त हो जाएगी।
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