चांदनी
नई दिल्ली. ट्रांस फैट हृदय के लिए नुकसानदायक होता है। ट्रांस फैट की हल्की मात्रा प्राकृतिक तरीके से मिलती रहती है और अधिकतर ट्रांस फैट कृत्रिम तरीके से लिये जाने वाले वनस्पति तेल खासकर हाइड्रोजनेटिक से मिलता है। फैट में हाइड्रोजनेशन की वजह से खाने को पकने में आसानी होती है और प्राकृतिक तेलों से यह जल्द खराब नहीं होता। इससे भोजन स्वादिष्ट बनता है साथ ही इसे ज्यादा समय तक रखा जा सकता है।
ट्रांस फैट से रक्त में एलडीएल या 'बैड' कोस्ट्रॉल बढ़ जाता है जिससे हृदय बीमारी होती है। इससे एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल में भी कमी हो जाती है जो कि हृदय बीमारी को रोकने में मददगार होता है। सैचुरेटिड फैट के सेवन से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है लेकिन एचडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी नहीं होती है। लेकिन जब सैचुरेटिड का लिपिड प्रोफाइल पर उल्टा असर होता है तो भी उससे इतना नुकसान नहीं होता जितना कि ट्रांस फैटी एसिड से।  ट्रांस फैटी एसिड्स डीसैचुरेशन और ईलोंगेशन ऑफ एन-3 (ओमेगा-3) फैटी एसिड्स में भी दखलंदाजी कर सकते हैं। ये हृदय बीमारी को काबू करने और गर्भ की जटिलताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़  

नर्सेज हेल्थ स्टडी के एक विश्लेषण में दिखाया गया कि ट्रांस फैट से दो फीसदी की ऊर्जा में इजाफा से कोरोनरी हार्ट डिसीज का खतरा 1.93 गुना बढ़ जाता है। ट्रांस फैटी एसिड्स के लेने के ऐसे कोई फिजियोलॉजिक फायदे के बारे में जानकारी नहीं है जिससे कहा जा सके कि इससे फायदा होता है, लेकिन इनकी कमी का असर होता है।

ट्रांस फैटी एसिड्स आम तौर पर बाजार में मिलने वाली कई चीजों का मुख्य तत्व होता है जिनमें कुकीज और केक व खूब फ्राई किये गए भोजन शामिल हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक एक व्यक्ति को रोजाना 2 ग्राम से अधिक ट्रांस फैट नहीं लेना चाहिए और यह मात्रा इतनी है कि व्यक्ति इसे प्राकृतिक रूप से ले लेता है।

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