स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली.   राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, प्रधान मंत्री कार्यालय राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि कृत्रिम बादल बनाने के कुछ कार्यक्रम वाणिज्यिक फर्मों द्वारा व्यापक क्षेत्र को शामिल करने वाले सरकारी और स्थानीय स्तर के निजी ट्रस्ट, दोनों के विभिन्न प्रायोजकों के साथ समझौते के तहत चलाए जा रहे हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश राज्यों ने पिछले साल तक निजी फर्मों से भाड़े पर कृत्रिम बादल बनावाने का कार्य किया है तथा इन कार्यों के लिए संबंधित राज्य सरकारों द्वारा वित्त पोषण किया गया है। 

आज लोक सभा में उन्होंने बताया कि भारतीय उष्ण देशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे, वर्ष 2008-2012 तक के दौरान एक राष्ट्रीय बहु वार्षिक कार्यक्रम बादल एरोसॉल अंतर्संबंध तथा वर्षा वृध्दि प्रयोग (सीएआईपीईईएक्स) चला रहा है। प्रायद्वीपीय भारत के वर्षा की दृष्टि से प्राकृतिक बाधा वाले प्रदेशों में अनुसंधान मोड़ में जुलाई-अगस्त, 2010 के दौरान कृत्रिम वर्षा करने के लिए कृत्रिम बादल बनाने का प्रस्ताव है। इन प्रदेशों में महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों के भाग शामिल हैं।

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