चांदनी
नई दिल्ली. फिर से गुस्से को याद करना भी खतरनाक होता है। फिर से गुस्सा आने की वजह सिम्पैथेटिक ओवरएक्टिविटी होती है। इसकी वजह से एड्रीनलाइन और नोरैड्रीनलाइन स्तर बढ़ जाता है जिससे प्लेक रप्चर होता है परिणामस्वरूप हार्ट अटैक या म्योकार्डियल इनफार्कशन (एमआई) होता है। 
तनाव बचाव विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने कहा कि दोबारा गुस्सा आना गुस्से से भी बुरा होता है जिसकी वजह से व्यक्ति दबाव महसूस करने लगता है। दोनों ही खतरनाक होते हैं। एक्सप्रेस एंगर की वजह से प्लेक से रप्चर तक होता है जिसकी वजह से हार्ट अटैक या एमआई होता है, जबकि सप्रसिव एंगर की वजह से क्रोनिक सिम्पैथेटिक ओवरएक्टिविटी होती है जिससे प्लेक के बनने में मदद मिलती है।

इससे बचने का सही तरीके से गुस्से को काबू करने के तरीके अपनाएं और एस्प्रेशन या सप्रेशन दोनों तरह के गुस्से से खुद को दूर रखें। जो लोग अपने गुस्से को काबू न कर पाते हों और हृदय रोगी हों तो उनको अपनी एस्प्रिन की डोज़ लेना नहीं भूलना चाहिए जैसा कि कहा जाता है कि गुस्से में एस्प्रिन का असर अच्छा होता है।

तनाव प्रबंधन और जीवन शैली  संबंधी समस्याओं से बचाव विषय पर कार्यशाला सह सम्मेलन का यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसका आयोजन ओम शांति रिट्रीट सेंटर, मनेसर के पास किया गया।

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