चांदनी
नई दिल्ली. ऐसे लोग जिनका ब्लड शुगर स्तर 100-125 एमजी/डीएल हो तो उनमें कोरोनरी हार्ट डिसीज का खतरा 300 फीसदी तक बढ़ जाता है बनिस्बत उन लोगों के जिनका स्तर 79 एमजी/डीएल से कम हो।

हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़ फास्टिंग ब्लड शुगर स्तर 125 एमजी/डीएल से अधिक हो ऐसे मरीजों में मधुमेह की संभावना तीन गुना ज्यादा होती है, लेकिन नये किये गए शोध में क्रॉस सेक्शनल स्टडी की गई और इसमें करीब 2500 लोगों को शामिल किया गया और इसमें सुझाया गया कि जिन गैर मधुमेहरोगियों में ब्लड शुगर स्तर बहुत ज्यादा हुआ तो उनमें कोरोनरी हार्ट डिसीज का खतरा कहीं ज्यादा होता है।

क्लीवीलैंड क्लीनिक फाउंडेशन अब फास्टिंग ब्लड शुगर 90 एमजी/डीएल या इससे अधिक को कोरानरी हार्ट डिसीज के खतरे का बायोमार्कर के तौर पर प्रयोग करता है। क्लीवीलैंड क्लीनिक तब कहीं ज्यादा चिंतित नजर आई जब किसी का फास्टिंग ब्लड शुगर 90 एमजी/डीएल से अधिक हो। वे इस पर व्यायाम, खुराक और वज़न पर काबू करके बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

पहले की कटऑफ 125 एमजी/डीएल डायबिटिक रेटिनोपैथी पर आधारित थी, लेकिन अब चिकित्सकों ने मधुमेह सम्बंधी खतरे को कोरोनरी हार्ट डिसीज से जोड़कर देखने पर जोर दिया है। अगर इस क्षेत्र में ऐसे ही परिणाम बढ़ते गए तो इससे मधुमेह की परिभाषा ही बदल जाएगी। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने फास्टिंग ब्लड शुगर को 80 एमजी/डीएल से नीचे रखने का सुझाव दिया।

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