चांदनी
नई दिल्ली. 60 फीसदी से ज्यादां मांएं यह सोचती है कि उनमें सबसे बड़ा खतरा स्तन कैंसर का है, लेकिन हृदय बीमारी का खतरा स्तन कैंसर से छह गुना ज्यादा होता है।

हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़ महिलाओं में कुछ खतरे के तथ्य पुरुषों से अलग होते हैं। महिलाओं में हृदय बीमारी के लक्षण हल्के हो सकते हैं। हार्ट अटैक अक्सर बिना चेतावनी के आता है। अगर महिला हृदय की बीमारी के बारे में इसके उपचार के लिए खुलकर नहीं बताती तो वह हृदय के स्वास्थ्य के लिए या एक बार लक्षण नजर आने पर जरूरी बदलाव में सफल नहीं हो पाती।



  • महिला को खतरा होता है अगर : उसके पिता या भाई जो 55 साल से कम उम्र में या मां अथवा बहन 65 साल से कम उम्र के हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एन्जियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी का सामना कर चुके हों।

  • महिला की उम्र 55 साल से अधिक हो। (65 साल की उम्र के बाद महिलाओं में तेजी से मृत्यु दर बढ़ जाता है।)

  • वह अगर धूम्रपान करती है या फिर रोजाना दितीयक तरीके से धूम्रपान का  का सामना करती हों।

  • उसका रक्तचाप 135/85 mm Hg से अधिक हो। ऑप्टिमल रक्तचाप 120/80 mm Hg होता है। ड्रग थेरेपी की जरूरत तब होती है जब रक्तचाप 140/90 mm Hg से ज्यादा हो और इससे रक्तचाप में (130/90 mm Hg) क्रोनिक किडनी डिसीज या डायबिटीज हो सकती है।

  • महिला रोजाना कम से कम 30 मिनट तक मध्य किस्म के व्यायाम न करती हो। इनमें हफ्ते के सातों दिन तेज गति से चलना जैसा व्यायाम षामिल है। वज़न पर काबू पाने के लिए महिलाओं को अधिकतर दिनों में 60 से 90 मिनट तक मध्यम किस्म के व्यायाम करने की जरूरत होती है। अमेरिका की 70 फीसदी महिलाएं नियमित रूप से व्यायाम नहीं करतीं।

  • उसे मधुमेह हो। 45 की उम्र के बाद महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा मधुमेह का खतरा होता है। अगर मधुमेह रोगी हों तो एचबीए1सी 7 फीसदी से कम रखने का लक्ष्य रखें।

  • उसका एचडीएल कोलेस्ट्रॉल यानी हाई डेंसिटी लीपो-प्रोटीन या ''गुड'' कोलेस्ट्रॉल 50mg/dL से कम हो। एलडीएल के लक्ष्य का खतरा खुद पर निर्भर करता है। महिलाओं को चाहिए कि वे अग्रलिखित लिपिड और लीपोप्रोटीन के स्तर को अपनी जीवन षैली के माध्मय से हासिल करें : एलडीएल -सी <100mg/dL;HDL-C>50mg/dL; ट्राइग्लाइसराइड्स <150mg/dL; और नॉन एचडीएल-सी (टोटल कोलेस्ट्रॉल में एचडीएल कोलेसट्रॉल को घटा देते हैं) <130 mg/dL । अगर महिला को बहुत ज्यादा खतरा या हाइपरकोलेस्ट्रॉलेमिया हो तो उसे सैचुरेटिड फैट 7 फीसदी से कम और कोलेस्ट्रॉल <200 mg/d लेना चाहिए। मधुमेह की षिकार महिलाओं को एलडीएल 100 से कम रखना चाहिए। वैस्कुलर डिसीज और बहुत ज्यादा खतरे वाली महिलाओं को चाहिए कि वे अपना एलडीएल 70 से कम रखें। एचडीएल 60 mg/dL को कार्डियो प्रोटेक्टिव माना जाता है। ज्यादा करने के लिए एचडीएल को रोजाना दो-तीन टेबल स्पून जैतून का तेल, धूम्रपान छोड़कर, नियमित रूप से एरोबिक व्यायाम और स्वास्थ्यपरक खुराक लेकर अपने वजन को सही रखा जा सकता है।

  • यदि उसका वज़न 20 पाउंड या इससे ज्यादा वज़न हो। (एक तिहाई से ज्यादा महिलाओं में 20 पाउंड या इससे ज्यादा वज़न बढ़ा हुआ है।)

  • प्राकृतिक तरीके से या फिर ऑपरेशन से जल्द मीनोपॉज यानी 40 की उम्र से पहले होने का संबंध कार्डियोवैस्कुलर डिसीज के बढ़ते खतरे से है।

  • गर्भ निरोधक दवाएं लेने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा उनमें खासकर बढ़ता है जो 35 से अधिक उम्र की होती हैं।

  • वह बहुत ज्यादा मांग या कम काबू की स्थिति वाली नैकरी जिसमें लगातार बहुत ज्यादा तनाव के साथ रहती हो। तनाव सामान्य जिन्दगी का एक हिस्सा है।

  • मात्रा में सेवन करें यानी रोजाना एक ड्रिंक से अधिक न लें। सीमित मात्रा में सोडियम लें यानी 2.3 ग्राम से कम नमक जो करीब एक चाय के चम्मच के बराबर होता है।  सभी तरह के ट्रांस फैटी एसिड (जो हाइड्रोजनेटिड ऑयल के नाम से तत्वों में लिखा रहता है) से परहेज करें। गर्भवती महिलाओं को ऐसी मछली खाने से परहेज करना चाहिए जिसमें बहुत ज्यादा मिथाइलमर्करी होती है।
निम्न में से तीन लक्षण नजर आएं तो उसे खतरे की श्रेणी में रखें-

  • फास्टिंग के बाद हाई ब्लड शुगर >100 mg/dL

  • -हाई ट्राइग्लाइसराड्स कम से कम 150 mg/dL

  • -लो एचडीएल महिलाओं में 50 mg/dL से कम

  • -रक्त चाप 130/85 या इससे ज्यादा हो

  • -कमर की चौड़ाई 35 इंच से अधक हो। (कमर की माप 35 इंच या इससे अधिक या वेस्ट टू हिप 0.80 से अधिक हो तो यह उच्च ट्राइग्लाइसराइड्स और लो एचडीएल स्तर को दर्शाती है।)

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