चांदनी
नई दिल्ली. मछली के तेल की गोलियां, ओमेगा 3 फैटी एसिड सें भरपूर भोजन, मछली, कैनोला ऑयल, सोयाबीन का तेल, फ्लैक्सीड्स और वेलनट्स; ये सभी रक्त चाप को कम करते हैं। 
चीन, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रौढ़ लोगों पर किये गए जर्नल हाइपरटेंशन में प्रकाशित अध्ययन  का हवाला देते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  ने बताया कि ओमेगा थ्री फैटी एसिड हृदय के लिए लाभकारी है। तेल वाली मछलियां जैसे सैलमोन, मैकेरेल व सार्डीनेस में दो तरह का ओमेगा 3 फैट- डीएचए और ईपीए होता है जो ब्लड फैट्स (जिसे ट्राइग्लाइसराइड्स कहते हैं) को कम करता है साथ ही खतरनाक ढंग से बढ़ जाने वाली दिल की धड़कन को रोकता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सुझाया कि वयस्क लोग हफ्ते में दो बार वसा से भरपूर वाली मछली खाएं और ऐसे लोग जो हृदय की बीमारी के शिकार हों वे डीएचए और ईपीए की अतिरिक्त पूर्ति के लिए मछली के तेलयुक्त गोलियां लें। पौधों से प्राप्त ओमेगा-3 को एएलए के नाम से जानते हैं जिसे डीएचए और ईपीए के पहले की स्थिति कह सकते हैं। नये अध्ययन में दिखाया गया है कि मछली और सब्जियों से प्राप्त ओमेगा-3 लेना रक्तचाप को काबू करने में सहायक है।

अध्ययन में दिखाया गया कि जैसे-जैसे ओमेगा-3 की मात्रा अधिक ली गई वैसे ही रक्तचाप में कमी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा फायदा बगैर उच्च रक्तचाप वालों को और ऐसे लोगों को हुआ जो रक्तचाप में कमी के लिए किसी भी तरह की दवाएं या विषेश खुराक नहीं ले रहे थे।

ओमेगा-3 फैट लेने के साथ ही अन्य पूरी खुराक का भी असर होता है जिसमें नमक, शराब और पाश्चरीकृत वसा की सीमित मात्रा के साथ ही प्रोटीन युक्त सब्जियां व पोटेशियम और कैल्षियम से भरपूर पोषण वाली चीजें लेना शामिल है। रक्तचाप में हर मिलीमीटर को मापा गया। हर पोषण का असर बहुत कम होता है लेकिन स्वतंत्र रूप से होता है इसलिए ये सब मिलकर ही रक्तचाप पर वास्तविक असर डालते हैं।

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