अनुराग  मुस्कान
क्या सीता को रावण से प्रेम हो सकता है? क्या रावण के साथ सीता की प्रेमलीला का कल्पना की जा सकती है। क्या कोई सोच भी सकता है कि सीता, रावण के प्रेमपाश में जकड़ सकती हैं या फिर रावण को अपने प्रेमपाश में बांध सकती हैं? फ़िल्म ‘रावण’ अभी रिलीज़ नहीं हुई है लेकिन कोई बता रहा था कि इस फ़िल्म में सीता की भूमिका से प्रेरित ऐश्वर्या राय बच्चन रावण की भूमिका निभा रहे अभिषेक बच्चन के साथ प्रेमालाप में लिप्त नज़र आएंगी। देखो भईया, अव्वल तो फ़िल्म देखे बिना इस टॉपिक पर किसी भी तरह की अटकल लगाना गुनाह-ए-अज़ीम माना जाएगा, लेकिन अगर फ़िल्म में ऐसा दिखाया भी गया है तो क्या...?

फ़िल्म ‘रावण’ में खैर रावण और सीता के बीच प्रेम संबंध दिखाने की ग़लती तो नहीं ही की गई होगी। संभव है, फ़िल्म में अभिषेक बच्चन रावण जितने बुरे बने हों और रावण की अच्छाई में छिपी उसकी बुराइयों को ख़त्म करने के लिए फ़िल्म की नायिका एक चांस लेती हो। क्योंकि कुछ बुराइयों के बिना तो रावण भी पूज्य ही था। फ़िल्म में रावण की तरह अभिषेक ने ऐश का अपहरण किया होगा और भाईलोगों ने उसे सीता अपहरण से जोड़कर हाय-तौबा मचा दी होगी। भई, फ़िल्म का नाम रावण है, अभिषेक रावण बने हैं और वो ऐश का अपहरण कर लेते हैं तो हो गईं ऐश्वर्या सीता। ये ज़रूरी नहीं है।

फ़िल्म ‘रावण’ का मुझे भी बेसब्री से इंतज़ार है। मणिरत्नम ने अगर कोई संवेदनशील सब्जेक्ट लिया भी होगा तो वो उसके साथ पूरा न्याय करने की कोशिश भी करेंगे। लेकिन सीता और रावण के बीच प्रेम की बात सुनना दिलचस्प रहा। राम को भी सीता पर समाज के इसी शक़ ने दुविधा में डाल दिया था। वरना सीता की अग्निपरीक्षा का औचित्य क्या था? मुझे राजकुमार संतोषी की फ़िल्म ‘लज्जा’ याद आ रही है। उस फ़िल्म में कुछ सवाल उठाए गए थे। क्या फ़िल्म ‘रावण’ में उनके जवाब मिल पाएंगे? ‘लज्जा’ में बड़ा बुनियादी सवाल उठाया गया था कि सीता, अपहरण के बाद रावण की अशोक वाटिका में रहीं अर्थात राम से अलग परपुरुष की छाया में रहीं इसलिए उन्हे अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्निपरीक्षा देनी पड़ी और अग्निपरीक्षा देने के बाद भी एक धोबी के कहने पर भगवान श्री राम ने उन्हे त्याग दिया। तो सवाल ये था कि राम भी तो सीता से उतने ही समय के लिए दूर रहे जितना कि सीता उनसे, तो राम की पवित्रता भी तो संदेह के दायरे में होनी चाहिए थी.... फिर राम की अग्निपरीक्षा क्यों ज़रूरी नहीं हो जाती? अरे भाई, सीता को किसी स्कीम में big bazaar से तो लाए नहीं थे। जिस पुरुषार्थ के दम पर लाए थे वो उसके बाद प्रमाणित क्यों नहीं हो सका? एक व्यक्ति की बतकही पर उनके अंदर का राजा जयजयकार कराने को आतुर हो उठा। और राजाजी ने राजधर्म के आगे पतिधर्म बिसरा दिया। क्यों भाई... इससे पहले भी राजपाठ उस प्रजा की अनर्गल बातों के आधार पर चलाया था क्या?

ज़रा सोचिए, आज के समाज में एक सुखी जीवन जी रहे पति-पत्नी में से पति अगर राम हो उठे तो कितनी सीताएं त्याग दी जाएंगी?

ऐसे में राम से भला तो रावण रहा... जैन्टलमैन था वो तो। उसने अपहरण के अलावा सीता के साथ कभी कोई अभद्रता तो नहीं की। और इस अभद्रता का परिणाम भी उसने मृत्यु पाकर भुगता, लेकिन राम को क्या सज़ा मिली अपनी आराध्या पर अविश्वास करने की? भरे समाज में उसे अपमानित करने की? पत्नी से दूर महल में रहकर जमीन के बिछौने पर सोने और कंदमूल फल खाने को क्या राम की सज़ा माना जा सकता है? दूसरे के लिए बिना अपराध भी आप ही सज़ा तय करेंगे और अपने लिए भी आप ही तय करेंगे। ये कैसा न्याय है भईया...? अच्छा.... राजा हैं न आप। और वैसे भी राजा के सामने तो सब प्रजा ही हैं। सीता राम की पत्नि और प्रजा दोनों थीं। तो अगर राम, राजा होने के नाते पत्नि के पक्ष में ना सोच कर प्रजा के पक्ष में सोच रहे थे तो भी सीता के साथ अन्याय कैसे कर बैठे?

‘लज्जा’ फ़िल्म में माधुरी दीक्षित से एक बड़ा सवाल उठावाया गया था। वो ये कि, ‘राम ने तो रावण से पूरी सेना को साथ लेकर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन रावण से असली युद्ध तो सीता ने लड़ा था और वो भी अकेले... सीता अगर रावण के सामने समर्पण कर देतीं तो....? तो राम और उनकी सेना किससे और किसलिए लड़ पाते?’ सारा का सारा तामझाम धरा रह जाता। कहने वाले कह सकते हैं कि क्या कमी थी रावण में... सोने की लकां का मालिक था। रावण अगर अच्छा व्यक्ति नहीं था तो क्या ये बात राम के बारे में पूरे विश्वास के साथ कही जा सकती है? जहां सीता पूरी पवित्रता के साथ रावण के समक्ष डटी रहीं वहीं सीता की निष्ठा भुलाकर राम ने उन पर संशय करके उन्हे कलंकित कर दिया। राम इसके लिए जन्मों-जन्मों तक सीता के अपराधी रहेंगे। माफ़ी चाहूंगा, लेकिन मर्यादा पुरषोत्तम राम का किरदार अपुन की समझ में तो नहीं आया रे भाई। या फिर अपने ही भेजे में कोई कैमिकल लोचा होगा। क्या मालूम। सबके अपने-अपने राम सबकी अपनी-अपनी राय।

खैर....! ‘रावण’ फ़िल्म में क्या दिखाया जाएगा? अब तो मेरा ऊहापोह, कौतुहल और उत्सुकता और बढ़ गई है।
(लेखक स्टार न्यूज़ में न्यूज़ एंकर हैं)   

एक नज़र

कैमरे की नज़र से...

Loading...

ई-अख़बार

Like On Facebook

Blog

  • अक़ीदत के फूल... - अपने आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को समर्पित कलाम... *अक़ीदत के फूल...* मेरे प्यारे आक़ा मेरे ख़ुदा के महबूब ! सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आपको लाखों स...
  • अक़ीदत के फूल... - अपने आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को समर्पित एक कलाम... *अक़ीदत के फूल...* मेरे प्यारे आक़ा मेरे ख़ुदा के महबूब ! सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आपको लाख...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं