चांदनी  
नई दिल्ली. सामान्य रूप से स्वाइन फ्लू हल्का होता है और इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं होती, लेकिन फ्लू जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 

हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़   उच्च आशंकित समूह में शामिल हैं: 
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे खासकर वे जो 2 साल से कम उम्र के हों। 
  • 65 साल या इससे अधिक उम्र के लोग।
  • 19 साल से कम उम्र के जो लम्बे समय से एस्प्रिन ले रहे हों और वे भी आशंकित श्रेणी में आते हैं जो इनफ्लुएंजा वायरस इंफेक्शन से ग्रसित हो चुके हों।
  • गर्भवती महिलाएं।
  • क्रोनिक मेडिकल वाली महिलाएं जिनको मेडिकल केयर की जरूरत होती है, उनमें षामिल हैं-
  • क्रोनिक पल्मोनरी डिसीज जिसमें अस्थमा शामिल है (खासकर अगर सिस्टमिक ग्लोकोटीकॉयडय की जरूरत पिछले साल से रही हो)।
  • हृदय संबंधी बीमारी आइसोलेटिड हाइपरटेंशन को छोड़कर।
  • एक्टिव मैलिग्नेंसी।
  • क्रोनिक रीनल इनसफिसिएंसी।
  • क्रोनिक लीवर डिसीज
  • डायबिटीज मैलीटस
  • हीमोग्लोबिनोपैथीज जैसे कि सिकल सेल डिसीज
  • इम्युनोसप्रेशन जिसमें एचआईवी संक्रमण शामिल (खासकर अगर सीडी4 <200 सेल्स/माइक्रोएल), ऑर्गन या हीमैटोपायटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन, इनफ्लेमैटरी डिसआर्डर जिनका उपचार इम्युनोसप्रेशैट्स से चल रहा हो।
  • स्पानल कॉर्ड इनजरी, सीजर डिसऑर्डर, न्यूरोमस्कुलर डिसआर्डर, सेरीब्रल पल्सी, मेटाबॉलिक स्थितियां शामिल हैं।
  • वे बच्चे जो मेटाबॉलिक डिसआर्डर की गिरफ्त में हों जैसे कि मीडियम चेन एसिल सीओए डीहाइड्रोजीनेज डेफिसिएंसी, जो लम्बे समय तक भूख को बर्दाश्त न कर पाते हों।
  • कम पौष्टिक आहार लेने वाले बच्चे ओर तरल लेने वाले क्योंकि दस्त से लम्बे समय तक डायरिया में इसकी कमी होती है।
  • नर्सिंग होम में रहने वाले और अन्य क्रोनिक देखभाल करने वाले।
  • बिना स्पलीन के लोग
  • मोटापा वाले

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