स्टार न्यूज़ एजेंसी 
नई दिल्ली. हृदय रोगी और लकवे के शिकार हो चुके मरीज जैसे ही अपने आपको फिट महसूस करते हैं, वे सामान्य सेक्स जीवन बिता सकते हैं। 

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़  दिल की बीमारी और स्ट्रोक की बीमारी से दुरुस्त होने के बाद व्यक्ति अवसाद का जीवन जीने लगता है, जबकि वह सामान्य स्थिति है और ऐसे 85 फीसदी मामलों में व्यक्ति तीन महीने में फिट हो जाता है। अगर एक व्यक्ति एक किलोमीटर चल सके या फिर दो मंजिल की इमारत सीढ़ियों से चढ़ सके और इस दरम्यान उसके सीने या सांस लेने में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न हो तो वह बगैर हृदय संबंधी खतरे के शादीशुदा जीवन बिता सकता है। 

जीवन साथी से इतर संबंध  बनाना हृदय रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि ऐसे में वे अपनी स्थिति, समय और जगह को संभालते रहते हैं और अधिकतर मामलों में साथी की उम्र कम होती है। 40 की उम्र के बाद पहली बार इरेक्टाइल डिसफंक्शन का होना कोरोनरी ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है जो ऐसा ब्लॉकेज होता है जो पुरुष के अंग में होता है जिससे रक्त की आपूर्ति हृदय को होती है, वह चैनल ब्लॉक हो जाता है।

वियाग्रा जैसी ड्रग्स हृदय रोगियों के लिए बून है और इनसे ब्लड सर्कुलेशन से पुरुष अंगों में बेहतरी संभव है और सक्रिय तरीके से काम करते हैं। मगर ऐसे मरीजों को नाइट्रेट नहीं लेना चाहिए, क्योंकि नाइट्रेट व वियाग्रा के एकसाथ लेने से ब्लड प्रेशर की स्थिति जानलेवा स्तर तक कम हो सकती है।

हार्ट ब्लॉकेज के ऐसे भी मरीज हैं जिनकी स्थिति अस्थिर है और जिन्होंने सालों से अपने साथी के साथ शादीशुदा संबंध न बनाएं हों और बिना चिकित्सीय सलाह के वियाग्रा जैसी ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हों। कोई भी व्यायाम जिससे मरीज में कोरोनरी ब्लॉकेज हो जो मौन तरीके से भी संभव है, से व्यक्ति को हार्ट अटैक व अकस्मात मौत हो सकती है।  

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