सरफ़राज़ ख़ान

नई दिल्ली. मानसून के दौरानरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता में कमी हो जाती है। इसलिए इससे कई तरह की बीमारियां भी सामने आती हैं। मानूसन के दौरान होने वाली बीमारियां हैं- मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, पीलिया, गैस्ट्रो इन्टेस्टाइनल संक्रमण जैसे टायफाइड हैजा। इन बीमारियों के अलावा वायरल संक्रमण से ठंड खांसी की शिकायत भी हो सकती है।


हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़   चिकनगुनिया के मरीजों में जोड़ों में दर्द होता है, जिसमें अंग विषेश में खिंचाव के जरिए आराम मिलता है। डेंगू का अगर पर्याप्त उपचार नहीं करवाया गया तो यह एक से चार फीसदी लोगों में जानलेवा हो सकता है, लेकिन चिकनगुनिया जानलेवा नहीं होता है, लेकिन इसकी वजह से सालों तक जोड़ों में दर्द हो सकता है। डेंगू के उपचार में तरल पदार्थ लेना और प्लेटलेट को फिर से हासिल करना होता है। अगर काफी मात्रा में तरल पेय दे दिया जाए तो जान बचायी जा सकती है। मौत का खतरा आमतौर पर तब होता है जब बुखार उतर रहा होता है। डेंगू के मरीजों में एंटी फीवर मेडिसिन के दुरुपयोग से रक्तस्राव की समस्या हो सकती है।

बारिश के पानी का जमा होना मच्छरों के पलने बढ़ने का रास्ता बनाता है। पीने के पानी का  होना आम है। डायरिया और गैस्ट्रो इन्टेस्टाइल संक्रमणों से बचने के लिए जरूरी है कि साफ और शुद्ध  पानी पियें।

बारिश के दौरान गंदे पानी में टहलने से कई तरह के फंगल संक्रमण पैर नाखूनों को निशाना बनाते हैं। खासकर मधुमेह रोगियों को अपने पैरों का विषेश ख्याल रखना चाहिए। हमेशा पैरों को साफ और सुखाकर रखें। गंदे पानी में चलने से बचें। जूते, मोजे और रेनकोट साफ और सूखे रखें।

जहां पर अस्थमा रोगी रहते हैं, वे विशेष रूप से अपने घरों के आस पास काई को जमने दें। अस्थमा रोगी फ्यूमिगेशन से परहेज करें। बारिश के दिनों में कीड़े जमीन के अंदर से आकर सब्जियों में अपनी पहुंच बना लेते हैं। कमजोर डाइजेस्टिव फायर के होने से गैस संबंधी समस्या हो सकती है। इसी वजह से इस मौसम में शादियां तक नहीं करनी चाहिए। लोगों को चाहिए कि वे हल्का भोजन लें। खाने में जौ, चावल और गेहूं लें। पानी को उबालकर इस्तेमाल करें। रोजाना अदरक और हरे चना खाना फायदेमंद साबित होते हैं। हमेशा ताजा, हल्का और गरम खाना ही खाएं।

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