सरफ़राज़ ख़ान
नई दिल्ली. सभी वयस्कों को मध्यम किस्म की व्यायाम कम से कम 30 मिनट हफ्ते के पांच दिन या फिर तीव्र किस्म की एक्सरासाइज हफ्ते के तीन दिन कम से कम 20 मिनट करनी चाहिए।
 
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की नई दिशा-निर्देश का हवाला देते हुए हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल  ने बताया कि शारीरिक गतिविधि आज की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संबंधी  समस्या है। सिर्फ सिगरेट पीने वालों को छोड़कर इससे सबसे ज्यादा समस्या और मृत्यु के मामले सामने आते हैं। इससे पहले 1995 में सुझाव दिया गया था कि मध्यम किस्म का व्यायाम हफ्ते के सातों दिन 30 मिनट तक किया जाना चाहिए।

एक उदाहरण देते हुए डॉ. अग्रवाल ने बताया कि मध्यम किस्म की एक्सरसाइज का मतलब तेज गति से चलना, हल्की जॉगिंग या ऐसा काम जिससे दिल की धड़कन बढ़ जाए। वहीं दूसरी ओर तेज गति से व्यायाम में जॉगिंग के साथ ही तेज गति से सांस लेना और तेजी के साथ दिल की धड़कन बढ़ जाती हैं। नए दिशा-निर्देशों में वज़न उठाने के व्यायाम को भी शामिल किया गया है जिसमें मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाया जाता है और इसमें आठ से दस अलग-अलग किस्म के तरीकों को एक दिन के अंतराल में अपनाया जाता है। यहां तक कि 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को भी वज़न उठाने और संतुलन प्रशिक्षण में शामिल किया जाना चाहिए।

हृदय गति को बहुत ज्यादा आराम और सांस का बढ़ना खतरनाक
 परंपरागत योग की परिभाषा में कहा गया है कि जो एक बार खाता है वह योगी, जो दो बार खाए वह भोगी और जो तीन बार खाए वह है रोगी। 'जितना कम खाएंगे, उतना ज्यादा जियेंगे' विख्यात कहावत है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कुछ ऐसा ही सच हृदय गति के आराम और सांस की दर के साथ है। हृदय गति को काफी आराम और सांस की दर का सम्बंध व्यक्ति की उम्र से जुड़ा है। परंपरागत योग में भी सिखाया जाता है कि एक सुनिश्चित संख्या की हृदय गति और सांस की दर और पहले आप इनका इस्तेमाल कर चुके हों तो बाद में इसकी भरपाई हो जाएगी, लेकिन शरीर में वह अलग तरह से होगी। सांस और पल्स दर दोनों में कमी लाने के प्रयास किये जाने चाहिए। इन दोनों में कमी प्राणायाम, योग और ध्यान को अपनाकर की जा सकती है।

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