असलम ख़ान
नई दिल्ली.  मानसून के मौसम में कहीं ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  के मुताबिक़    लोगों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण होता है कि सड़क सुरक्षा बचाव संबंधी  जानकारी को फिर से जानें।

  • गाड़ी धीमी चलाएं। बरसात के दिनों में तेज गाड़ी चलाना हादसों की नंबर वन वजह होती है। 
  • अगर कोई सड़क हादसा आपके वाहन से हो जाता है या वाहन खराब हो जाता है तो जितनी जल्दी संभव हो उसे रोड से हटा दें साथ ही इमरजेंसी बत्तिायां चालू कर दें और सुरक्षित जगह पर लगा दें। 
  • टायर प्रिंट पर कार चलाएं। जब गाड़ी पतले पानी की सतह पर चलती है तो पानी और सड़क के बीच एक लेयर बन जाती है। पानी पहले से ही प्रिंट पर लग जाता है जिससे आप बेहतर ढंग से चलाने में कामयाब होते हैं।
  • अगर आपकी कार में स्टीयरिंग उचित ढंग से काम न कर रही हो तो हल्के ब्रेक का इस्तेमाल करें। अगर आपको लगे कि टायर पर पत्थर लगा हुआ है तो धीमे-धीमे गाड़ी पर काबू पाएं।
  • रुके हुए पानी में गाड़ी तेज गति से न चलाएं। 
  • मोटरसाइकिल वाले क्रॉसवॉक लाइन और अन्य खतरों पर खास ध्यान दें।
  • टायर और वाइपर्स चेक कर लें। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि कई हादसों की वजह इसलिए होती है कि चालक को बारिश के न चलते वाइपर की वजह से आगे की चीज दिखाई न दे।
  • अपनी और अपने आगे वाले वाहन के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें। आपके ब्रेक लगाने की दूरी बारिष के दिनों में गीली सड़क पर वास्तव में बढ़ जाती है।
  • जहां तक संभव हो घुमाव वाली जगह में कभी भी ब्रेक न लगाएं। घुमाव वाली जगह में घुसने से पहले ब्रेक लगाएं।
  • किसी भी लेन में बदलाव से पहले यातायात के सूचकों का प्रयोग करें और आगे अपने चारों ओर देखने के बाद ऐसा करें।
  • रुके हुए पानी में गाड़ी तेज गति से न चलाएं। 
  • अपनी और अपने आगे वाले वाहन के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें। आपके ब्रेक लगाने की दूरी बारिश के दिनों में गीली सड़क पर वास्तव में बढ़ जाती है।
  • जहां तक संभव हो घुमाव वाली जगह में कभी भी ब्रेक न लगाएं। घुमाव वाली जगह में घुसने से पहले ब्रेक लगाएं। किसी भी लेन में बदलाव से पहले यातायात के सूचकों का प्रयोग करें और आगे अपने चारों ओर देखने के बाद ऐसा करें।
  • अपनी लेन न बदलें।
  • डार्क ट्रैफिक सिग्नल या लाल बत्ती का मिचमिचाने का मतलब हर एक को रुकना होता है। आप ड्रिल स्लो डाउन के बारे में जानें। 

एक नज़र

ई-अख़बार

Blog

  • सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं - हमने पत्रकार, संपादक, मीडिया प्राध्यापक और संस्कृति कर्मी, मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी की किताब 'उर्दू पत्रकारिता का भवि...
  • रमज़ान और शबे-क़द्र - रमज़ान महीने में एक रात ऐसी भी आती है जो हज़ार महीने की रात से बेहतर है जिसे शबे क़द्र कहा जाता है. शबे क़द्र का अर्थ होता है " सर्वश्रेष्ट रात " ऊंचे स्...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Like On Facebook

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं