अनीता पटनायक
भारत में महिलाओं की स्थिति में एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। महिलाओं की मर्यादा और उनके लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की संवैधानिक गारंटी के साथ ही शिक्षा, राजनीति,खेलेकूद आदि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी लगातार बढ रही है। राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2001 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया था और महिलाओं को स्वशक्ति प्रदान करने की राष्ट्रीय नीति अपनायी थी। महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। देश के मेरूदंड, ग्रामीण भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ पंचायती राज प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे कई महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में निर्वाचित होने का प्रोत्साहन मिला है जो उनके राजनीतिक सशक्तिकरण का संकेत है।

महिला सशिक्तकरण-2001 के लिए राष्ट्रीय नीति
महिला-पुरूष समानता के सिध्दांत को भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, राज्यों के लिए नीति निर्देशक तत्वों में ही प्रतिष्ठापित किया गया है। संविधान न केवल महिलाओं के लिए समानता की गारंटी प्रदान करता है बल्कि राज्य को महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक कदम उठाने का हक भी प्रदान करता है। पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-78) के समय से ही भारत महिलाओं के सशक्तिकरण को समाज में उनकी स्थिति निर्धारित करने के लिए केंद्रीय मुद्दे के रूप में लेकर चल रहा है और सरकार महिला मुद्दे को कल्याण से लेकर विकास के रूप में लाकर अपने दृष्टिकोण में एक बहुत बड़ा बदलाव लाया है। महिलाओं के अधिकारों और कानूनी हकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सन् 1990 में संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की गयी। पंचायतों और नगर निगमों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए सन् 1993 में 73 वां और 74 वां संविधान संशोधन किया गया। इस प्रकार स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी की आधारशिला रखी गयी। भारत ने महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करने वाले विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संधिपत्रों को भी अनुमोदित किया है। उनमें सन 1993 में महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन संबंधी संधिपत्र का अनुमोदन सबसे प्रमुख है।

लक्ष्य एवं उद्देश्य
राष्ट्रीय नीति का लक्ष्य महिलाओं की उन्नति, विकास और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। उसके उद्देश्यों में महिलाओं के विकास के लिए सकारात्मक आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों के माध्यम से ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करना है जिससे महिलाएं अपनी क्षमता को साकार कर सकें तथा स्वास्थ्य देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, समान पारिश्रमिक एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकें। उनमें महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव एवं हिंसा का उन्मूलन तथा सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव भी सुनिश्चित करना शामिल है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय मिशन
सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस वर्ष राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की है और आठ मार्च, 2010 को इसकी अधिसूचना जारी की गयी। मिशन का लक्ष्य महिला केंद्रित कार्यक्रमों को मिशन के रूप में लागू करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय गरीब और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार कार्यक्रम को सहयोग दे रहा है। इस योजना का लक्ष्य महिलाओं का कौशल उन्नयन, उद्यमिता कौशल का विकास, संपत्ति सृजन और उन्हें छोटे व्यवहारिक समूहों में एकजुट करना है ताकि लाभार्थी महिलाएं रोजगार सह आय सृजन गतिविधियां शुरू कर सकें। मंत्रालय ने सबसे अधिक प्रभावित महिलाओं को समग्र और संपोषणीय तरीके से मजबूत करने के लिए प्रियदर्शिनी नामक योजना भी शुरू की है और वह महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाकर और उनके लिए कौशल उन्नयन कार्यक्रम चलाकर उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, कानूनी एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के हल में जुटा हुआ है।

स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
मंत्रालय केंद्र प्रायोजित योजना भी लागू कर रहा है। स्कीम का डिजायन ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को स्वरोजगार और आय सृजन गतिविधियां शुरू करने के वास्ते प्रोत्साहित करने के लायक बनाया गया है। सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले वर्गों को विशेष सुरक्षा प्रदान की गयी जिसके तहत अनुसूचित जातिजनजाति को 50 फीसदी, महिलाओं को 40 फीसदी, अल्पसंख्यकों को 15 फीसदी तथा विकलांगों को तीन फीसदी का आरक्षण प्रदान किया गया है। इसे शुरू किये जाने से लेकर अबतक 37 लाख स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं और 134 लाख स्वरोजगारियों को लाभ पहुंचाया गया है जिसमें से करीब 70 लाख (52फीसदी) महिलाएं हैं। राष्ट्रीय महिला कोष असंगठित क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह के तहत संगठित महिलाओं को आय सृजन के लिए लघु त्रऽण प्रदान करता है।

भारत दृष्टिकोण 2020
भारत दृष्टिकोण 2020 दस्तावेज ने श्रमबल में महिलाओं की चर्चा करते हुए इसका उल्लेख भी किया है कि कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित बाल देखभाल सेवाएं बहुत जरूरी है। योजना आयोग के ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना दस्तावेज में महिला एवं बाल विकास के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। इसमें कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए असंगठित क्षेत्र में पालना की स्थापना करने तथा मौजूदा राजीव गांधी राष्ट्रीय पालना योजना को नया स्वरूप दिये जाने पर बल दिया गया है।

महिलाओं के लिए हेल्पलाइन
सन् 2001 की जनगणना के मुताबिक देश में करीब तीन करोड़ 43 लाख विधवाएं और 23 लाख 40 हजार तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आश्रय आधारित स्वधार और शोर्ट स्टे होम्स योजनाएं चला रही हैं जिनके तहत मुश्किल समय से गुजर रही महिलाओं को सहयोग प्रदान करने के लिए क्रियान्वयन एजेंसियों को वित्तीय सहायता दी जाती है। सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वृध्दों के लिए चलायी जा रही समेकित योजना के तहत गैर सरकारी संगठनों को वृध्द विधवाओं के लिए बहुसुविधा परक देखभाल केंद्र चलाने के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृध्दा पेंशन योजना चला रहा है जिनके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली 40 से 64 वर्ष की विधवाओं को 200 रुपये मासिक पेंशन दिये जाने के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

महिला नेतृत्व सम्मेलन 2010
मंत्रालय ने राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के अवसर पर इस वर्ष छह मार्च को नई दिल्ली में महिला नेतृत्व सम्मेलन का आयोजन किया। इसका उद्धाटन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया था। सम्मेलन का उद्देश्य सशक्त महिलाओं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, को दुनिया के सम्मुख लाना था। सम्मेलन का मुख्य ध्येयवाक्य समग्र वृध्दि और ग्रामीण भारत की महिलाओं का सशक्तिकरण था। उपलब्धि हासिल करने वाली कई महिलाओं ने कोरपोरेट, वित्तीय सेवाएं, कृषि, विज्ञान, मीडिया, पंचायती राज, खेलकूद, संस्कृति, शिक्षा और कानून जैसे विविध क्षेत्रों में चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार रखे।

सरकार की 100 दिनों की कार्य योजना
100 दिनों की कार्ययोजना के रूप में सरकार ने महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढाने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव रखा था। इसमें पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने तथा सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व बढाने के लिए संविधान संशोधन का भी प्रस्ताव रखा है।

महिला विरोधी गतिविधियों के खिलाफ भारत का अभियान
सरकार महिलाओं के साथ हुए अन्याय के खिलाफ अभियान जारी रखकर उन्हें भारत में उचित दर्जा प्रदान करने के लिए कई कठोर कदम उठाती आ रही है। उनमें घरेलू हिंसा के खिलाफ सुरक्षा, बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी, कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न पर रोकथाम, महिलाओं और बच्चों द्वारा भिक्षावृति, दहेज मामलों में उत्पीड़न का उन्मूलन, महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर करना, बलात्कार पीड़ित महिलाओं को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करना शामिल है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को 11,000 करोड़ रूपए आवंटित किए हैं जो पिछले वित्तीय वर्ष के 7350 करोड़ रूपए बजट अनुमान से करीब करीब 50 फीसदी ज्यादा है।

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