स्टार न्यूज़ एजेंसी 
नई दिल्ली. जल संसाधन राज्य मंत्री वींसेंट एच. पाला ने लोक सभा में बताया कि केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने सूचित किया है कि किसी क्षेत्र में भूजल स्तर में गिरावट घरेलू, औद्योगिक और साथ ही कृषि क्षेत्रों सहित सभी उद्देश्यों के लिए भूजल की निकासी का संचयी प्रभावी होता है। सीजीडब्ल्यूबी द्वारा राज्य भूजल विभागों के साथ किए गए आकलन के अनुसार, देश में कुल उपयोग किए जाने वाले भूजल में कृषि का हिस्सा 92 प्रतिशत हैं शेष 8 प्रतिशत का उपयोग घरेलू तथा औद्योगिक क्षेत्रों में होता है।

सीजीडब्ल्यूए अति दोहित, गंभीर और अर्ध-गंभीर क्षेत्रों में नए उद्योगों/परियोजनाओं द्वारा भूजल की निकासी को विनियमित करता हैं सीजीडब्ल्यूए ने इन क्षेत्रों में भूजल की निकासी को विनियमित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं तथा राज्य सरकारों से इन दिशा-निर्देशों को कार्यान्वित करने का अनुरोध किया है, उन्होंने भूजल विकास के विनियमन हेतु 43 क्षेत्रों को 'अधिसूचित' किया है तथा इन क्षेत्रों में पीेने तथा घरेलू उपयोग हेतु भूजल की निकासी की अनुमति प्रदान करने के लिए जिला स्तरीय प्राधिकारियों को अपनी विनियामक शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया है, अधिसूचित क्षेत्रों में मानदंडों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों को पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई करने हेतु प्राधिकृत अधिकारियों को सौप दिया जाता है।
तथापि, जल संसाधन मंत्रालय ने प्रतिमान विधेयक की तर्ज पर उपयुक्त विधान को अधिनियमित करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भूजल के विकास तथा प्रबंधन के विनियमन एवं नियंत्रण पर एक प्रतिमान विधेयक परिचालित किया हैं। भूजल विकास को 11 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों नामत: आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, लक्षद्वीप, केरल, पोंडीचेरी, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली में अधिनियमित किया जा चुका हैं। 18 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधान को अधिनियमित करने की प्रक्रिया में हैं। शेष राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से भी इसी प्रकार के विधान को अधिनियमित करने का अनुरोध किया गया है।

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