अंबरीश कुमार 
रायबरेली (उत्तर प्रदेश). प्रियंका नहीं, यह तो कांग्रेस की दूसरी इंदिरा गांधी है । यह बात रायबरेली पहुंची प्रियंका गांधी से आज सलोन विधान सभा क्षेत्र मिलने आए पिचहत्तर साल के जगदंबा प्रसाद ने कही । यह टिपण्णी प्रियंका गांधी के राजनैतिक करिश्मा की एक बानगी है । प्रियंका गांधी आज दोपहर मुंशीगंज से यहाँ पहुंची और राजीव गांधी ट्रस्ट के अतिथि गृह में विभिन्न विधान सभा क्षेत्रों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं से मिली । अंदाज वही पुराना,जिसमे लोग उनके भीतर इंदिरा गांधी देखते है । हावभाव वही ,बालों की शैली वही और भीड़ में उसी तरह लोगों के बीच बिना किसी झिझक पहुँच जाना। मुस्कुराते हुए लोगों से उनका हाल चाल लेना और जो दिक्कते आ रही है उनकी जानकारी लेना। इससे पहले प्रियंका ने यह भी कहा कि वे रायबरेली अमेठी की जिम्मेदारी निभाएंगी पर अगर राहुल गांधी कहेंगे तो आगे की भी सोची जाएगी । पर कांग्रेस के जानकारों के मुताबिक पार्टी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी को सत्ता का दूसरा केंद्र नही बनाएगी । प्रियंका गांधी कांग्रेस का अंतिम ब्रह्मास्त्र है इसलिए फिलहाल मौजूदा चुनाव में भी उनकी सीमा रेखा तय है । प्रियंका गांधी सिर्फ रायबरेली अमेठी तक सीमित रहेंगी पर वे समूचे प्रदेश की नजरों में बनी रहेंगी यह भी सच है ।
कांग्रेस के मीडिया प्रबंधन के सर्वेसर्वा राजबब्बर ने जनसत्ता से कहा -यह बात सही है कि आगे बढती कांग्रेस के चुनाव प्रचार में प्रदेश के बहुत से चुनाव क्षेत्रों से प्रियंका गांधी को प्रचार में भेजने की मांग हो रही है पर इस बारे में पार्टी ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। वे परंपरागत रूप से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र का काम संभालती रही है और इस बार भी वहा वे पुरानी जिम्मेदारी निभा रही है । राजबब्बर इसके आगे इस विषय पर कुछ बोलने को तैयार नहीं थे । इसी से यह अंदाज लगया जा सकता है यह मामला कितना संवेदनशील है ।
वैसे भी जब मामला राहुल ,सोनिया और प्रियंका गांधी का आता है तो कांग्रेस के प्रवक्ता हाथ खड़े कर देते है । पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न देने की शर्त पर कहा -उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में में सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी पार्टी में सत्ता का केंद्र है । ऐसे में अगर प्रियंका गांधी को भी मैदान में उतार दिया गया तो सत्ता का एक अलग केंद्र बन जाएगा और राहुल गांधी के लिए राजनैतिक मोर्चे पर दिक्कत पैदा हो जाएगी । मीडिया से लेकर विपक्ष तक राहुल और प्रियंका के राजनैतिक करिश्मे की तुलना कर विवाद पैदा कर देगा । इसलिए प्रियंका गांधी को रायबरेली और अमेठी तक सीमित करने का फैसला पार्टी और परिवार दोनों के लिए बेहतर है । खुद प्रियंका गांधी भी इस सीमा के पक्ष में रही है । पिछले लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने इस संवाददाता से कहा था -मै राजनीति में नही हूँ ,पर अपने परिवार की मदद करने आई हूँ और आगे भी आती रहूंगी । प्रदेश के दूसरे हिस्सों में प्रचार करने के बारे में पूछे गए सवाल पर प्रियंका ने कहा, मैं अभी तक इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है। इस वक्त मैं यहां कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने आई हूं। बाद में मैं और भाई :राहुल: मिल बैठकर तय करेंगे।पर प्रियंका गांधी ने आगे यह भी जोड़ा -अपने भाई की मदद करने के लिये मैं कुछ भी करूंगी। वह जो कहेंगे मैं करूंगी।
प्रियंका को लेकर रायबरेली के लोग काफी संवदनशील है ।उनमे लोगों को इंदिरा गांधी नजर आती है । सिर्फ शक्ल सूरत ही नही हावभाव और तेवर में भी । ऐसा आक्रामक तेवर जो इंदिरा गांधी में दिखता था । वर्ष १९९९ में जा कांग्रेस के दिग्गज नेता अरुण नेहरु गांधी परिवार के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ रहे थे । तब प्रियंका गांधी ने रायबरेली में कुछ जनसभाए की । हरचंदपुर की जनसभा में प्रियंका गांधी ने नाराज होकर लोगों से कहा था -आप लोगों ने इस गद्दार को यहाँ घुसने कैसे दिया । यह वही अंदाज था जो रायबरेली के लोग इंदिरा गांधी में देखते थे और आज प्रियंका गांधी में देख रहे है । यही वजह है कि प्रियंका गांधी स्टार प्रचारकों पर भारी पद रही है और उनकी मांग बढ़ रही है ।
(लेखक जनसत्ता से जुड़े हैं)

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