अंबरीश कुमार 
राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से फिर बड़ा दांव लगाने जा रहे हैं। राज्य के पिछले चुनाव में उनके सामने अखिलेश यादव बड़ी चुनौती बने थे पर देश के चुनाव में राहुल  को चुनौती देने वाला कोई युवा चेहरा नहीं है। यह भी सच है। लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश फिर से संघर्ष का मैदान बनेगा और इसकी तैयारी कांग्रेस ने शुरू कर दी है। राजनीति में समाजवादी संत के रूप में मशहूर आचार्य नरेंद्र देव की तीसरी पीढ़ी के सौम्य छवि वाले निर्मल खत्री (अयोध्या-फैजाबाद के सांसद) को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना कर पार्टी ने एक नया संदेश देने का प्रयास किया है।
देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी का मुकाबला दिखा कर मुसलिम मतदाताओं को गोलबंद कर सकती है। इस हालात में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा फायदा भले न हो पर दूसरे राज्यों में कांग्रेस का समर्थन बढ़ सकता है। खांटी समाजवादी और कांग्रेस के बड़बोले मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा यह कह चुके हैं कि अगला चुनाव राहुल और मोदी की बीच होना है। अगर मुकाबला राहुल बनाम मोदी हुआ तो उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस कुछ बेहतर कर सकती है, ऐसा राजनीति के जानकारों का मानना है। हालांकि भाजपा अभी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। क्योंकि उसे गुजरात चुनाव के नतीजों का इंतजार है। गुजरात विधानसभा का चुनाव मोदी का आगे का रास्ता तय करेगा।
लेकिन मोदी को लेकर न भाजपा गंभीर है और न कांग्रेस, यह भी रोचक तथ्य है। भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि भाजपा में प्रधानमंत्री पद का कोई उम्मीदवार तय नहीं किया गया है और हमारे यहां चार पांच नेता इस पद के लायक हैं। जबकि कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने कहा-आप बहुत गलत तुलना कर रहे हैं। मोदी फिरकापरस्त दल के क्षेत्रीय नेता  हैं। जबकि राहुल गांधी राष्ट्रीय दल के राष्ट्रीय नेता हैं, जिनके मुकाबले में कोई नहीं है। पार्टी आलाकमान उत्तर प्रदेश के लिए नई रणनीति बना रहा है और राहुल गांधी जल्द ही पूरी ताकत के साथ राज्य में फिर उसी तेवर में नजर आएंगे।
दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र नाथ भट्ट के मुताबिक अगर लोकसभा चुनाव राहुल बनाम मोदी  हुआ तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को ज्यादा फायदा होगा पर दूसरे राज्यों में कांग्रेस भारी पड़ेगी। दूसरे यह मुद्दा उठते ही महंगाई और भ्रष्टाचार का मुद्दा हाशिए पर जा सकता है।
हालांकि उत्तर प्रदेश में राहुल के लिए रास्ता बहुत आसन नही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी सरकार के छह महीने पूरे होने के साथ ही गांव, किसान और  नौजवान  के लिए कई ठोस पहल करने जा रहे हैं। जिसमें किसानों को बिजली से लेकर नौजवानों को बेरोजगारी भत्ता आदि शामिल है। समाजवादी पार्टी भी लोकसभा चुनाव की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व वामपंथी नेताओं से संवाद शुरू कर रहा है और तीसरे विकल्प  के लिए नई जमीन तैयार करने की भी कवायद चल रही है। मगर इसके लिए समाजवादी पार्टी को लोकसभा में अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा-लोकसभा में हम तीन चौथाई सीटे जीतेंगे और मुलायम सिंह केंद्र में बड़ी भूमिका निभाएंगे। ऐसे में कांग्रेस के लिए खासकर राहुल गांधी के लिए उत्तर प्रदेश चुनौती भी है। (लेखक जनसत्ता से जुड़े हैं) 

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