फ़िरदौस ख़ान 
हाल में हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए. दोनों ही चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए अच्छे रहे. जहां हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को कामयाबी मिली, वहीं गुजरात में पार्टी के वोट फ़ीसद में इज़ाफ़ा हुआ और कांग्रेस को पिछली बार से दो ज़्यादा सीटें यानी 61 सीटें मिली हैं.

हिमाचल प्रदेश विद्यानसभा चुनाव में 68 सीटों के लिए मतदान हुआ. कांग्रेस ने 36 सीटों पर जीत दर्ज की, भारतीय जनता (भाजपा) पार्टी  को 26 सीटों पर जीत मिली, जबकि निर्दलीय पांच सीटों पर और हिमाचल लोकहित कांग्रेस एक सीट पर विजयी रही. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. पांच बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष 78 वर्षीय वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण सीट पर जीत दर्ज की. वीरभद्र सिंह ने इस क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के ईश्वर रोहल को 20 हज़ार वोटों से हराया. इस चुनाव में रिकॉर्ड 74.7 फ़ीसद मतदान हुआ.

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इस बार 1990 के चुनाव के बाद सर्वाधिक सीटें हासिल की हैं. 2007 में गुजरात चुनाव में कांग्रेस का वोट फ़ीसद 38 था, जो अब बढ़कर 39 फ़ीसद हो गया है. 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज़ 33 सीटें मिली थीं, जबकि इससे पहले 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 149 सीटों के साथ गुजरात की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ क़ाबिज़ हुई थी. 1995 में उसके खाते में सिर्फ़ 45 सीटें आईं. इसी तरह 1998 में 53 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस को 2002 के चुनाव में 51 सीटें मिलीं. 2007 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी सीटों में थोड़ा इज़ाफ़ा किया और वह 59 के स्तर पर पहुंच गई.

भाजपा सत्ता में तो लौट आई, लेकिन उसकी सीटों की संख्या में पिछले चुनाव के मुक़ाबले दो की कमी आई है और उसका वोट तक़रीबन एक फ़ीसद कम हुआ है. भाजपा को इस बार 115 सीटें मिली हैं. पिछले चुनाव में उसे 117 सीटें मिली थीं. भाजपा का वोट फ़ीसद 49 के मुक़ाबले 48 हो गया है. हिमाचल में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. गौरतलब है कि गुजरात में इस बार 13 और 17 दिसंबर को दो चरणों में हुए मतदान में 71.30 फ़ीसद मतदान हुआ. पिछली बार मतदान का फ़ीसद 59 था.

बहरहाल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है.

एक नज़र

ई-अख़बार

Blog

  • सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं - हमने पत्रकार, संपादक, मीडिया प्राध्यापक और संस्कृति कर्मी, मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी की किताब 'उर्दू पत्रकारिता का भवि...
  • रमज़ान और शबे-क़द्र - रमज़ान महीने में एक रात ऐसी भी आती है जो हज़ार महीने की रात से बेहतर है जिसे शबे क़द्र कहा जाता है. शबे क़द्र का अर्थ होता है " सर्वश्रेष्ट रात " ऊंचे स्...
  • राहुल ! संघर्ष करो - *फ़िरदौस ख़ान* जीत और हार, धूप और छांव की तरह हुआ करती हैं. वक़्त कभी एक जैसा नहीं रहता. देश पर हुकूमत करने वाली कांग्रेस बेशक आज गर्दिश में है, लेकिन इसके ...

एक झलक

Like On Facebook

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं