फ़िरदौस ख़ान
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज फ़ोन के ज़रिये अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने मुल्क में सेक्युलर और नेशनलिस्ट शिक्षा के मज़बूत स्तंभ की शक्ल में अपनी पहचान बनाई है. मॉडर्न एजुकेशन में अव्वल रहकर एक सदी से उसूलों को ज़िंदा रखा हुआ है. हिंदुस्तानी जम्हूरियत की सबसे ख़ास बात अनेकता में एकता और गंगा-जमुना तहज़ीब है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी इस तहज़ीब की सच्चे मायनों में नुमाइंदगी करती है. अनेकता में एकता को लेकर यहां का कमिटमेंट महज़ रस्मे-दस्तूर नहीं, बल्कि ज़िंदगी के तजुर्बों से निकला सच है. ये इस बात का भी सबूत है कि अनेकता में एकता एक ख्याली बात नहीं, एक संकल्प है और वो उसूल हैं, जो इस यूनिवर्सिटी की स्थापना से जुड़े हुए हैं, जिसकी झलक यहां की तालीम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पूरी तरह से मिलती है. मैं इस बात से वाक़िफ़ हूं कि, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अक़लियती दर्जे का मसला सुप्रीम कोर्ट में है. मैं आप लोगों को यक़ीन दिलाती हूं कि इस अज़ीम यूनिवर्सिटी के तारीख़ी किरदार और ख़ुदमुख्तारी को बनाए रखने की पूरी कोशिश करूंगी. वाइचाइंसलर साहिब ने यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने के बारे में बात की. कुछ दिनों पहले मुझे आपकी स्टूडेंट यूनियन का मेमोरेंडम भी मिला. मैं इन सभी मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत ज़रूर करूंगी और हर मुमकिन कोशिश करूंगी कि इस पर भरपूर काम कर सकूं. हमारे ख़ानदान का अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से गहरा ताल्लुक रहा है. पंडित जवाहर लाल नेहरू का तो ऐसा रिश्ता था कि अपनी तमाम मसरुफ़ियत के बावजूद भी वे वक़्त निकालकर यहां कई बार तशरीफ़ लाए. इस यूनिवर्सिटी ने उन्हें ऑरनरी लाइफ मेंबरशिप से भी नवाज़ा. मुझे नाज़ है कि आप लोगों ने हमेशा हमारी हौसलाअफ़ज़ाई की है और हमारे ख़ानदान के लोगों के नाम पर यहां की कई संस्थाओं के नाम भी रखे हैं. हिन्दुस्तान की मिलीजुली तहज़ीब इंसानी तारीख़ के सबसे अहम समागमों में से एक है. ज़िंदगी का कोई भी पहलू सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और साहित्यिक इसके रचनात्मक प्रभाव से अछूता नहीं है. चाहे चारों तरफ़ फैली इमारतों और आर्किटेक्चर की शानो-शौकत को देखो, अवधि विरासत के पन्नों को पलटो, मौसिखी या पेंटिंग की दुनिया में खो जाओ. उनके असरात हर जगह मिलेंगे. मुख्तसर यह कि हमारी रूह में बस गया है. इस्लाम आज हिंदुस्तान की मिट्टी में इस तरह से रच बस गया है कि यहां का अटूट हिस्सा हो गया है. यहां के मुसलमानों ने अपनी एक ख़ास पहचान बना ली है और मुल्क की तरक्की में नाक़ाबिले-फ़रामोश योगदान दिया है. जवाहर लाल नेहरू ने इसका तस्करा बड़े अच्छे अंदाज़ में ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में किया है. इस समुदाय ने हिंदुस्तान को बड़े क़द्दावर नेता दिए हैं, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान दिया. ख़ुद इस यूनिवर्सिटी का अनगिनत मशहूर और तारीख़ी शख्सियतों से ताल्लुक़ रहा है. ख़ान अब्दुल गफ्फार ख़ान, मौलाना शौकत अली, मोहम्मद अली, ज़ाकिर साहब, हज़रत मुहानी, रफ़ी अहमद किदवई, अब्दुल महजीद वाजा, केएम अशरफ़ और शेख़ अब्दुला जैसा हस्तियां क़ाबिले-ज़िक्र हैं, जिन्होंने आने वाली नस्लों की हौसलाअफ़ज़ाई की.

अब मैं कुछ बातें डिग्री पाने वाले स्टूडेंट से करना चाहूंगी.यह हम सभी जानते हैं कि आज कई युवा महिलाएं अपनी डिग्री लेने वाली हैं. अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के अब्दुला गर्ल्स कॉलेज ने कई उल्लेखनीय महिलाएं देश को दी हैं. डॉ. रशीद जहां और इशमत जैसी कई महिलाएं, जिन्होंने नस्लीय पूर्वाग्रहों और सांप्रदायिक चुनौतियों का सामना करते हुए बेहतरीन काम किया. वे सभी आप लोगों के लिए प्रेरणा की मूर्ति होनी चाहिए. आज सफलता इतनी आसान नहीं है और अचानक ही सबकुछ नहीं बदल सकता है. आपको जुटना होगा, कड़ी मेहनत करनी होगी और हर चुनौती का डटकर सामना करना होगा. हालात से निपटना होगा. ऐसे कई लोग आपको मिलेंगे, जो आपको हतोत्साहित करने की कोशिश करेंगे. कुछ ऐसे होंगे, जो कुछ नहीं बदलने की बात करेंगे. उन पर विश्वास मत करना. देश को महिला पेशेवरों की हर स्तर पर ज़रूरत है. आप अपने अभिभावकों, इस यूनिवर्सिटी की सहायता ले सकती हैं, जिन्होंने आपको अपने सपने पूरा करने का यह सुनहरा मौक़ा दिया है. आप कर सकती हो और आप ज़रूर जीतोगी. आप सभी युवा छात्र और छात्राएं, जिन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मौक़ा मिला. ऐसे लोगों के बीच जिन्होंने आपको क़ाबिल बनाया है. यह मेरी उम्मीद है कि आप सभी ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आते रहेंगे. यह दुनिया एक असमान जगह है, लेकिन यह अच्छी बात है कि हम हर परिस्थिति बेहतर तरीक़े से ढल जाते हैं. आप जानते हैं कि हम एक बहुत बड़े समाज में रहते हैं, जिसका वर्णन कोलंबस ने भी किया है. आपको संभावनाएं तलाशनी होंगी. सिर्फ़ अपने लिए नहीं सोचना है, बल्कि सुनिश्चित करना होगा कि देश की और हमारी भी प्रगति हो. हमारे देश का भविष्य और इसका नेतृत्व आपके हाथों में है. हम चाहते हैं कि आप अपनी पूछताछ का एक दृष्टिकोण विकसित करें, उस पर ज़ोर दें और अपना एक दृष्टिकोण तैयार करें. ख़ुद पर और अपनी योग्यता पर विश्वास करें. इसी आधार पर तो आप नेतृत्व हासिल कर सकेंगे, जिसके पास ज्ञान है यह दुनिया उसी के पीछे चलती है. इक़बाल ने कहा है और मैं भी इसे कोट करना चाहूंगी ‘सितारों से आगे जहां और भी है’. ये कुछ शब्द मेरे मन में थे. अगर आप सामंजस्य बनाकर और लक्ष्य लेकर चलोगे, तो ज़रूर सफल होगे, और इस विश्वविद्यालय के शिक्षक और यहां के छात्र यह कर सकते हैं. इस विश्वविद्यालय के महान विचार आकाश को छूते हैं. यह आपकी यूनिवर्सिटी का तराना हैं. जो अबर यहां से उठेगा, वो सारे जहां पर बरसेगा, मेरी दुआएं हमेशा आपके साथ हैं.

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