स्टार न्यूज़ एजेंसी
दिमाग़ी तनाव के समय ब्लड प्रेशर का बढऩा ख़ून में प्लॉक के बढ़ने के सबसे बड़ा लक्षण है.
हार्ट केयर फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष और मूलचंद मेडिसिटी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक़ ऐसे में, उन सभी मरीज़ों को मेंटल स्ट्रेस टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए जिनके ग्रीवा धमनी में प्लॉक हो. अगर यह टेस्ट पॉज़िटिव आता है, तो मरीज़ को प्लॉक को स्थिर करने वाली दवाएं शुरू करनी चाहिए. इससे हार्ट अटैक और लकवा होने का ख़तरा और उसके चांसेज काफ़ी हद तक कम हो जाते हैं. उन मरीज़ों में जिनमें लक्षण स्पष्ट हों और नेक आर्टरी में प्लॉक हो, तो भविष्य में हार्ट अटैक और लकवे का ख़तरा काफ़ी ज़्यादा रहता है. प्लॉक के आकलन के लिए किसी भी ईकोकार्डियोग्राफ़ी लैबोरेटरी में हाई रेज़ोल्युशन अल्ट्रासाउंड करा सकते हैं. नेक आर्टरी की मोटाई के साथ प्लॉक 2.4 गुना ज़्यादा बढ़ता है.

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